भारतीय रेल को अब आधिकारिक तौर पर 18वां रेलवे जोन मिल गया है। रेल मंत्रालय द्वारा जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक नए जोन का नाम दक्षिण तट रेलवे रखा गया है। यह नया जोन अगले महीने की पहली तारीख से पूरी तरह काम करना शुरू कर देगा। इसकी सबसे खास बात यह है कि इसका मुख्यालय आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया है। साल 2019 के बजट में इसकी घोषणा की गई थी और अब करीब सात साल बाद यह योजना जमीन पर उतरती दिखाई दे रही है।
विशाखापत्तनम होगा मुख्यालय
नए दक्षिण तट रेलवे जोन का हेडक्वार्टर विशाखापत्तनम में बनाया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी 2025 में इसका शिलान्यास भी कर चुके हैं। इस प्रोजेक्ट के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने 52 एकड़ से ज्यादा जमीन उपलब्ध कराई थी। बताया जा रहा है कि नए मुख्यालय को तैयार करने में करीब 184 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। रेलवे मंत्रालय का मानना है कि इससे दक्षिण भारत में रेल संचालन और प्रशासन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
इन डिवीजनों को किया गया शामिल
दक्षिण तट रेलवे जोन को मौजूदा पूर्वी तट रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे के कुछ हिस्सों को मिलाकर बनाया गया है। इसमें गुंतकल, गुंटूर और विजयवाड़ा डिवीजन को शामिल किया गया है। इसके अलावा पुराने वाल्टेयर डिवीजन को भी दो हिस्सों में बांटा गया है। ओडिशा वाला हिस्सा पूर्वी तट रेलवे में रहेगा, जबकि बाकी क्षेत्र को नए विशाखापत्तनम डिवीजन के तहत लाया जाएगा। नए जोन में करीब 3300 रूट किलोमीटर रेल मार्ग शामिल होंगे।
ये भी पढ़ें : Ambani का सबसे बड़ा स्पेस प्लान, Musk की बादशाहत को सीधी चुनौती देने की तैयारी
चार राज्यों में फैला नेटवर्क
यह नया रेलवे जोन आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक तक फैला होगा। रेलवे अधिकारियों के मुताबिक इससे दक्षिण भारत में ट्रेनों के संचालन को और आसान बनाया जा सकेगा। रेलवे प्रशासन को भी इससे बेहतर नियंत्रण और तेज फैसले लेने में मदद मिलेगी। सरकार का मानना है कि नए जोन के बनने से यात्रियों को सुविधाएं बढ़ेंगी और मालगाड़ियों के संचालन में भी तेजी आएगी। यही वजह है कि इस फैसले को रेलवे के बड़े बदलावों में गिना जा रहा है।
क्या होता है रेलवे जोन
भारतीय रेलवे में जोन एक प्रशासनिक इकाई की तरह काम करता है। हर जोन का नेतृत्व एक जनरल मैनेजर करता है, जबकि उसके अंदर अलग-अलग डिवीजन होते हैं जिनकी जिम्मेदारी डीआरएम संभालते हैं। अभी तक भारतीय रेल में कुल 17 जोन थे, लेकिन अब दक्षिण तट रेलवे जुड़ने के बाद इनकी संख्या 18 हो गई है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार यह बदलाव आने वाले समय में दक्षिण भारत के रेल नेटवर्क को और मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।