Draft Voter List: उत्तर प्रदेश में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होते ही सियासी विवाद तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में प्रेस वार्ता कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियों का आरोप लगाया।
डुप्लीकेट वोटरों का आरोप
अखिलेश यादव ने अपनी लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली कन्नौज सदर विधानसभा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां बड़ी संख्या में डुप्लीकेट मतदाता पाए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि एक ही नाम और विवरण के कई वोटर सूची में दर्ज हैं, जो पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। सपा प्रमुख ने कहा कि अगर एक विधानसभा की स्थिति यह है, तो पूरे प्रदेश में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
तारीख बढ़ाने पर संदेह
सपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया की तारीख दो बार बढ़ाई गई, जिसका कारण प्रशासनिक नहीं बल्कि राजनीतिक था। उनके मुताबिक, यह विस्तार इसलिए किया गया क्योंकि सत्तारूढ़ दल की तैयारी पूरी नहीं थी। उन्होंने आशंका जताई कि चुनाव आयोग पर दबाव डालकर यह फैसला कराया गया।
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आयोग से अपील
अखिलेश यादव ने याद दिलाया कि निर्वाचन आयोग ने नवंबर 2025 में SIR की घोषणा के समय मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध और समावेशी बनाने का भरोसा दिया था। उन्होंने कहा कि मैपिंग और तकनीक के जरिए त्रुटिरहित सूची तैयार करने की बात कही गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। उन्होंने मांग की कि आयोग अपनी तकनीकी टीम से विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों को भी प्रशिक्षण दिलवाए।
निष्पक्षता पर उठे सवाल
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्था होने के बावजूद चुनाव आयोग सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है, जिससे उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का पारदर्शी और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है। इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में SIR प्रक्रिया को लेकर बहस और तेज हो गई है।