Stir in Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को लेकर नई अटकलें सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के असंतुष्ट सांसद एक अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की तैयारी में हैं। चर्चा है कि ये सांसद नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी में शामिल हो सकते हैं और उसके बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
दिल्ली में हुई अहम बैठक
सूत्रों के अनुसार रविवार को केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बागी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक के बाद सांसदों का एक समूह लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलने पहुंचा। बताया जा रहा है कि सांसदों ने अपनी राजनीतिक स्थिति और आगे की रणनीति को लेकर चर्चा की। इस दौरान कई प्रमुख सांसदों की मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और तेज कर दिया।
अलग गुट बनाने की कोशिश की चर्चा
बताया जा रहा है कि इससे पहले कुछ सांसदों की ओर से हस्ताक्षरयुक्त पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा गया था, जिसमें अलग संसदीय गुट बनाने और NDA को समर्थन देने की बात कही गई थी। सूत्रों का दावा है कि बागी सांसद अब नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी के साथ विलय का विकल्प भी तलाश रहे हैं। यह पार्टी पूर्वोत्तर राज्यों, असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में सक्रिय बताई जाती है।
अभिषेक गुट ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, अभिषेक बनर्जी की ओर से सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर कथित अलग गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की है। उनका तर्क है कि ऐसा कदम संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं होगा। पार्टी नेतृत्व इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है और स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा है।
बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है हलचल
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बागी सांसदों के कदम पर नाराजगी जताई है। पार्टी का कहना है कि जिन्होंने अलग रास्ता चुना है, वे अब पार्टी की विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करते। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि बागी सांसदों का कोई नया राजनीतिक गठजोड़ या विलय होता है, तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति और आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष और संबंधित सांसदों के अगले कदम पर टिकी हुई है।