Sugar Price Hike : त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले चीनी की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले एक महीने में देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब 6.6 फीसदी बढ़ी है। 7 अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, चीनी का औसत भाव 50.30 रुपये प्रति किलो पहुंच गया, जबकि करीब एक महीने पहले यह 47.17 रुपये प्रति किलो था। पिछले साल की तुलना में भी कीमत करीब 9 फीसदी अधिक बताई जा रही है।
एक महीने में इतना महंगा हुआ चीनी का भाव
ऑल इंडिया एवरेज प्राइस के अनुसार, 7 अगस्त को देशभर में चीनी की औसत खुदरा कीमत 50.30 रुपये प्रति किलो रही। एक महीने पहले यह औसत कीमत 47.17 रुपये प्रति किलो थी। यानी करीब 30 दिनों में खुदरा भाव में 3.13 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, इसलिए कीमतों में यह तेजी घरेलू बजट पर असर डाल सकती है।
सरकार ने डीलरों के स्टॉक पर लगा दी सीमा
बढ़ती कीमतों के बीच सरकार ने चीनी की जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए डीलरों के लिए स्टॉक होल्डिंग लिमिट लागू की है। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से लागू हुई और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। सरकार का उद्देश्य बाजार में पर्याप्त सप्लाई बनाए रखना और जमाखोरी के जरिए कीमतों को प्रभावित करने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
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सिर्फ मांग-सप्लाई नहीं, इन वजहों पर भी नजर
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के मुताबिक, हाल में चीनी की एक्स-मिल कीमतों में हुई बढ़ोतरी मौजूदा मांग और सप्लाई की स्थिति के हिसाब से उचित नहीं है। सरकार के सामने ऐसी गतिविधियों की जानकारी भी आई है, जिनमें कुछ ट्रेडर्स, डीलर्स और बिचौलियों द्वारा स्टॉक जमा करने की आशंका जताई गई है। सट्टेबाजी वाले लेनदेन और बिना वास्तविक सप्लाई के कागजी कारोबार से भी बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनने की बात कही गई है।
हर हफ्ते देना होगा स्टॉक का हिसाब
सरकार ने कहा है कि घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए सरकार लगातार स्थिति पर नजर रख रही है। नए नियमों के तहत चीनी डीलरों को अपने स्टॉक की जानकारी खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर देनी होगी और हर सप्ताह स्टॉक अपडेट करना होगा। सरकार की निगरानी का मकसद जमाखोरी और सट्टेबाजी पर रोक लगाकर बाजार में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को नियंत्रित करना है।