
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि बिहार विधानसभा चुनाव के दोनों चरणों के नामांकन पूरे होने के बाद ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. यह बयान आयोग ने बिहार SIR (विशेष सघन पुनरीक्षण) मामले की सुनवाई के दौरान दिया. जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अपनी सहमति जताई और मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को तय कर दी है.
ADR की दलील: मतदाता सूची वेबसाइट पर डाली जाए
इस मामले की सुनवाई के दौरान एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि चुनाव आयोग ने विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम सूची के बाद भी संशोधन का अधिकार रखा है. इसलिए आयोग को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि मतदान के समय कौन-सी सूची लागू होगी और उसे वेबसाइट पर सार्वजनिक किया जाए.
आयोग पहले से ही ऐसा करने की बना चुका योजना- वकील
चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि आयोग पहले से ही ऐसा करने की योजना बना चुका है. उन्होंने बताया कि 17 अक्टूबर को पहले चरण का नामांकन पूरा हो जाएगा. जबकि 20 अक्टूबर को दूसरे चरण का नामांकन खत्म होगा. इसके बाद ही अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि चुनाव आयोग एक जिम्मेदार संवैधानिक संस्था है और उसे अपने कर्तव्यों का भलीभांति ज्ञान है.
“याचिकाकर्ताओं ने फर्जी दस्तावेजों के साथ हलफनामा किया दाखिल”
इसके साथ ही वकील राकेश द्विवेदी ने याचिकाकर्ताओं पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि आयोग ने लोगों को मतदाता सूची से नाम हटने पर अपील का पूरा मौका दिया, लेकिन कोई व्यक्ति सामने नहीं आया. उन्होंने कहा, “अगर प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव वाकई चिंतित हैं, तो उन्हें बिहार जाकर लोगों की मदद करनी चाहिए थी, न कि यहां कोर्ट का समय बर्बाद करना चाहिए था.” वकील राकेश द्विवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि याचिकाकर्ताओं ने फर्जी दस्तावेजों के साथ हलफनामा दाखिल किया है, जिस पर कोर्ट को ध्यान देना चाहिए.
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SIR प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है या नहीं
वहीं दूसरी ओर याचिकाकर्ता पक्ष के वकील गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि पहले यह तय किया जाना चाहिए कि SIR प्रक्रिया कानूनी रूप से वैध है या नहीं. जिस पर प्रशांत भूषण ने भी तर्क देते हुए कहा कि चुनाव आयोग पूरे देश में SIR प्रक्रिया लागू करने की बात कर रहा है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट को इस पर व्यापक सुनवाई करनी चाहिए.
4 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
इस मामले को लेकर बेंच ने कहा है कि 4 नवंबर को वह SIR की वैधानिकता के पहलू पर चुनाव आयोग की दलीलें सुनेगी. साथ ही कोर्ट ने निर्देश दिया कि बिहार की वोटर लिस्ट जारी होने के बाद, याचिकाकर्ता उसकी समीक्षा करें और यदि उसमें कोई अनियमितता मिले, तो उसे अदालत में पेश करें.