Tetra Pack Liquor Sale: उत्तर प्रदेश की आबकारी नीति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि जो व्यक्ति शराब खरीदना चाहता है, वह किसी भी रूप में उसे खरीद सकता है। इसी के साथ कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड में टेट्रा पैक में शराब बिक्री की कोई ठोस अनुमति सामने नहीं आई है। इस मामले में दायर याचिका को निस्तारित कर दिया गया है।
अहम सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि टेट्रा पैक में शराब की बिक्री से बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि इस तरह की पैकेजिंग से बच्चे भी ऐसे पैक स्कूल ले जा सकते हैं। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि क्या किसी शहर में इस तरह की बिक्री से शैक्षणिक संस्थानों में कोई वास्तविक समस्या सामने आई है। अदालत ने इस मुद्दे पर ठोस प्रमाण की आवश्यकता पर जोर दिया।
सख्त टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि शराब खरीदने की इच्छा रखने वाला व्यक्ति उसके स्वरूप से प्रभावित नहीं होता। उनका कहना था कि पैकेजिंग बदलने से उपभोग की प्रवृत्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ता। इस टिप्पणी ने याचिका में उठाए गए तर्कों पर अदालत की दृष्टि को साफ कर दिया।
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नीति में स्पष्ट अनुमति का अभाव
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि प्रस्तुत दस्तावेजों में कहीं भी टेट्रा पैक में शराब बिक्री की स्पष्ट अनुमति का उल्लेख नहीं मिला। हालांकि, एक प्रशासनिक निर्णय के तहत छोटे पैक में बिक्री की बात सामने आई है, लेकिन उससे संबंधित पूरी नीति अदालत के समक्ष नहीं रखी गई। ऐसे में इस दावे की पुष्टि नहीं हो सकी।
प्राधिकरण को सौंपने का निर्देश
अदालत ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को यह छूट दी कि वह अपनी शिकायत संबंधित प्राधिकरण के समक्ष प्रस्तुत करे। कोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारी इस मामले की जांच कर उचित निर्णय लें। इस तरह अदालत ने मामले को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाया।