दिल्ली-NCR की जहरीली हवा पर सुप्रीम कोर्ट इस बार खुलकर भड़क गया. गुरुवार की सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने कहा कि अदालत कोई जादू की छड़ी नहीं घुमा सकती कि तुरंत हवा साफ हो जाए. उन्होंने बताया कि वह खुद सिर्फ एक घंटे की मॉर्निंग वॉक पर गए और तबीयत बिगड़ गई. अदालत ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का कोई एक कारण नहीं वाहनों का धुआं, पराली, निर्माण कार्य, फैक्ट्रियां और कूड़ा जलाना सब मिलकर हवा को जहर बना रहे हैं. CJI ने सवाल उठाया कि जब कारण इतने बड़े और कई तरह के हैं, तो सरकारें इसे गंभीरता से लगातार क्यों नहीं संभाल रहीं?
'सरकारें सिर्फ दिवाली वाले हफ्ते न जागें'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार दोनों की खिंचाई की. अदालत ने कहा कि हर साल दिवाली से कुछ दिन पहले सरकारें एक्टिव हो जाती हैं, लेकिन त्योहार खत्म होते ही फाइलें बंद होने लगती हैं. दिल्ली सरकार ने बताया कि GRAP लागू है, निर्माण कार्य रोके गए, पानी का छिड़काव हो रहा है, स्मॉग टावर चल रहे हैं और बसें बढ़ाई गई हैं. वहीं केंद्र ने बताया कि पराली पर निगरानी और 900 टीमें तैनात हैं. लेकिन कोर्ट ने पूछा अगर इतना सब हो रहा है तो AQI 450 तक कैसे जा रहा है? अदालत ने साफ कहा कि जमीन पर सुधार नहीं दिख रहा, इसलिए योजनाएं सिर्फ कागज पर नहीं, वास्तविक असर में दिखनी चाहिए.
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SC ने पूछा- अब तुरंत क्या कदम उठाए जाएंगे?
CJI ने कहा कि प्रदूषण का मसला सिर्फ वैज्ञानिकों या एक्सपर्ट्स पर नहीं छोड़ सकते. सरकारों को खुद ठोस और लंबे समय के समाधान पर काम करना होगा. अदालत ने कई सख्त सवाल पूछे क्या स्कूलों की सुरक्षा पर प्लान तैयार है? क्या खुले में खेल प्रतियोगिताएं रोकने की सलाह मानी गई? क्या पराली जलने पर कोई स्थायी रणनीति बनाई गई? कोर्ट ने कहा कि हवा साफ करना एक दिन का प्रोजेक्ट नहीं, मगर इतना जरूर होना चाहिए कि जनता को तत्काल राहत मिले. अदालत ने इस मुद्दे की हर हफ्ते नियमित सुनवाई करने का फैसला भी किया.
1 दिसंबर को अहम सुनवाई, बड़े फैसलों के संकेत
अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 दिसंबर को होगी और अदालत ने संकेत दिया है कि इस बार कड़े आदेश जारी हो सकते हैं. सवाल यह है कि क्या स्कूलों को फिर ऑनलाइन मोड में लाया जाएगा, क्या स्पोर्ट्स ईवेंट रोके जाएंगे, क्या वाहन प्रतिबंध और कड़े होंगे या फिर उद्योगों पर बड़ा एक्शन आएगा? सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कहा हवा की गुणवत्ता अब सिर्फ पर्यावरण नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जिंदगी का मुद्दा है. जब जज खुद प्रदूषण से बीमार पड़ रहे हैं, तो आम जनता की हालत का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं. अब पूरे NCR की नजरें कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं कि क्या शहर की सांसों को राहत मिल पाएगी या हालात यूं ही बिगड़ते रहेंगे।