NEET Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट ने NTA की ओर से आयोजित NEET-UG और दूसरी राष्ट्रीय परीक्षाओं में हो रही गड़बड़ियों पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कागजी नियमों की जगह एक मजबूत और स्थानी व्यवस्था बनानी होगी, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे। कोर्ट ने सरकार को नया हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए 3 सप्ताह बाद अगली सुनवाई की बात कही है।
UPSC की तरह काम करें NTA
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि सिर्फ कागजों पर नियम बनाना काफी नहीं है। इन नियमों को जमीन पर सही तरीके से लागू करना भी जरूरी है। उन्होंने यूपीएससी का उदाहरण देते हुए कहा कि एनटीए को भी बिना किसी गड़बड़ी के परीक्षाएं करानी होंगी। इसके लिए नई तकनीक समझने वाले विशेषज्ञ अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। जो बदलती तकनीक को समझते हों। याचिकाओं में कहा गया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक और तकनीकी खामियों से लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लग जाता है, इसलिए भरोसेमंद सिस्टम बनाया जाना जरूरी है।
आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल
वहीं, केंद्र सरकार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार डॉ. के. राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स की सिफारिशों को लागू करने के लिए कदम उठा रही है। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा के लिए जीपीएस और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि NEET परीक्षा के लिए बना सिस्टम पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना मुश्किल है।
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2 चरणों में नीट परीक्षा पर विचार
सरकार ने यह भी बताया कि जेईई की तर्ज पर नीट यूजी को भी दो चरणों में आयोजित करने और परीक्षा को कंप्यूटर आधारित बनाने के विकल्प पर विचार चल रहा है। इस पर कोर्ट ने यह भी कहा कि ऑनलाइन परीक्षा में साइबर सुरक्षा और डिजिटल एन्क्रिप्शन बेहद जरूरी हैं।
3 हफ्ते बाद होगी सुनवाई
सुनवाई के अंत में सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार और एनटीए से कहा कि वह सुधारों को लेकर हुई तरक्की की विस्तृत जानकारी दें। कोर्ट ने दोनों से प्रगति रिपोर्ट का एक हलफनामा मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 3 हफ्ते बाद होगी और कोर्ट इस पूरी प्रक्रिया पर खुद निगरानी रखेगा।