
Supreme Court Grants Major Relief: सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसिद्ध लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी की जांच मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को बड़ी राहत दी है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस बी.आर. गवई की बेंच ने सुनवाई करते हुए आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। हाई कोर्ट ने कहा था कि CBI निदेशक ने सुप्रीम कोर्ट के 2024 के आदेशों का उल्लंघन किया है, क्योंकि जांच एक ऐसे अधिकारी को सौंपी गई थी जो विशेष जांच दल (SIT) का हिस्सा नहीं था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने साफ किया कि SIT की कार्यप्रणाली या उसके सदस्यों पर कोई सवाल नहीं है।
हाई कोर्ट के आदेश पर उठे सवाल
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि CBI निदेशक ने जे. वेंकट राव नामक अधिकारी को जांच की जिम्मेदारी दी, जो SIT का हिस्सा नहीं थे। इसे अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्देशों का उल्लंघन माना था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि हाई कोर्ट का निष्कर्ष गलत है। उन्होंने कहा कि CBI ने जांच में किसी भी तरह की गलती नहीं की है और किसी अधिकारी को विशेष कार्य सौंपने में कोई अनुचितता नहीं है। इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी।
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CBI से मांगा जवाब, SIT की भूमिका पर सवाल नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में CBI को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या SIT ने अपना काम बंद कर दिया है और क्या विशेष परिस्थितियों में किसी अधिकारी को जांच का कुछ हिस्सा सौंपना गलत माना जा सकता है? सीजेआई ने साफ किया कि SIT की कार्यप्रणाली या उसकी निष्पक्षता पर कोई संदेह नहीं है। गौरतलब है कि तिरुपति मंदिर के लड्डू में मिलावटी घी के इस्तेमाल का आरोप लगने के बाद यह मामला देशभर में सुर्खियों में आया था। श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा होने के कारण इस मुद्दे पर काफी हंगामा हुआ और जांच की मांग तेज हो गई थी।