SC On CBSE 3-Language Rule: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा 9वीं कक्षा के छात्रों के लिए लागू की गई नई थ्री लैंग्वेज पॉलिसी का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस नई नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़ना अनिवार्य किया गया है, जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है।
नियम को थोपने का आरोप लगाया
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में तर्क दिया कि 1 जुलाई से यानी बीच सत्र में इस नियम को अचानक लागू कर दिया गया है। याचिकाकर्ताओं ने बिना किताबों और बिना योग्य शिक्षकों के इस नियम को थोपने का आरोप लगाया, साथ ही कहा कि छात्रों के पास नई भाषाओं की किताबें नहीं है। जिस पर सुप्रीम कोर्ट और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने स्थिति साफ की।
बच्चों के पास किताबें तक नहीं
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत में छात्रों की व्यावहारिक समस्याओं को पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि कक्षा 4-5 से बच्चे अलग पैटर्न पर पढ़ रहे थे। बच्चों के पास किताबें तक नहीं हैं। अगर नई भाषाएं सिखानी हैं, तो उस स्तर के योग्य शिक्षक कहां हैं? सिर्फ ऑनलाइन किताबें उपलब्ध बता देने से गांव-देहात के बच्चों का भला नहीं होगा।
यह भी पढ़ें: NCERT New Textbooks: 11वीं-12वीं की पॉलिटिकल साइंस की नई किताबें तैयार करेगी NCERT, नई टीम का गठन
शिक्षकों की जिम्मेदारी बोर्ड की
सुनवाई के दौरान CJI और ASG ने अदालत में टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर बोर्ड नई भाषा ला रहा है, तो शिक्षक भी वही उपलब्ध कराएगा। यह उनकी जिम्मेदारी है। सरकार की तरफ से पेश एडमिशन सॉलिसिटर जनरल ने स्पष्ट किया कि नई भाषाओं का केवल इंटरनल असेसमेंट होगा।
फेल होने पर भी 10वीं में प्रमोशन
अगर आप कोई छात्र 9वीं कक्षा में इन भाषाओं को पास या क्वालीफाई नहीं कर पाता है, तब भी उसे रोका नहीं जाएगा और 10वीं कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने माना कि अचानक नियम बदलने से चिंता होना स्वाभाविक है। अगर समस्याएं बनी रहती हैं, तो कोर्ट एक विशेषज्ञ समिति का गठन कर सकती है।