
Supreme Court Strict Order: आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों और रेबीज के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सख्ती दिखाई है। अदालत ने पश्चिम बंगाल और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को 3 नवंबर को फिजिकली पेश होने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा कि अब कोई वर्चुअल पेशी की अनुमति नहीं होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की अपील खारिज करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा, “कोई छूट नहीं, उन्हें कोर्ट में आना ही होगा।” कोर्ट ने नाराजगी जताई कि राज्यों ने बार-बार आदेश के बावजूद रिपोर्ट दाखिल नहीं की।
हलफनामा दाखिल न करने पर बढ़ी नाराजगी
यह मामला जुलाई 2025 में उस समय शुरू हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट ने बच्चों पर आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर खुद संज्ञान लिया था। कोर्ट ने 22 अगस्त को सभी राज्यों को एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) रूल्स 2023 के तहत नसबंदी, टीकाकरण और डीवर्मिंग की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। लेकिन 27 अक्टूबर को सुनवाई के दौरान पाया गया कि केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली MCD ने ही अनुपालन किया है। इस पर कोर्ट ने बाकी राज्यों के मुख्य सचिवों को तलब करते हुए कहा कि आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मानव और पशु सुरक्षा दोनों पर जोर
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की समस्या सिर्फ पशु कल्याण का नहीं बल्कि जनसुरक्षा का भी गंभीर मुद्दा है। कोर्ट ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि देशभर में अब तक 37 लाख से अधिक डॉग-बाइट के मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें सिर्फ दिल्ली में 25 हजार से ज्यादा घटनाएं हैं। अदालत ने सभी राज्यों से डॉग पाउंड, पशु चिकित्सक, कुत्ता पकड़ने वाले कर्मचारियों और वाहनों की उपलब्धता की विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने साफ किया कि यह कार्रवाई इंसानों और जानवरों दोनों के हित में है और इसमें ढिलाई अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं होगी।