Supreme Court orders: देशभर में बढ़ रही आवारा कुत्तों के काटने की घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि स्कूलों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों जैसे सार्वजनिक स्थानों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए और उन्हें शेल्टर होम में शिफ्ट किया जाए। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लेते हुए चिंता जताई कि ऐसे संस्थानों में लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा खतरे में है। कोर्ट ने कहा कि रेलवे स्टेशन, अस्पताल और शैक्षणिक संस्थान जैसे स्थान आवारा पशुओं से पूरी तरह मुक्त होने चाहिए।
डॉग शेल्टर होम में रखे जाएंगे आवारा कुत्ते
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच — जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया — ने अपने आदेश में कहा कि सभी राज्यों और नगर निकायों को मिलकर एक संयुक्त अभियान चलाना चाहिए ताकि सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों को पकड़कर शेल्टर होम में सुरक्षित रखा जा सके। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इन कुत्तों की देखभाल और टीकाकरण की जिम्मेदारी संबंधित स्थानीय प्रशासन की होगी। अदालत ने यह कदम जनता की सुरक्षा और बढ़ते रेबीज के मामलों को रोकने के उद्देश्य से उठाया है।
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राज्यों को कोर्ट की सख्त चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक कई राज्य इस मामले में उदासीन रहे हैं। 27 अक्टूबर को हुई पिछली सुनवाई में अदालत ने नाराजगी जताई थी कि केवल पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने ही अपने अनुपालन हलफनामे जमा किए हैं, जबकि बाकी राज्यों ने कोई जवाब नहीं दिया। शीर्ष अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि राज्यों ने इस आदेश का पालन नहीं किया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह फैसला मानव सुरक्षा और पशु कल्याण — दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी है।