
Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अदालतों को सीबीआई जांच का आदेश देने में संयम बरतना चाहिए और इसे “अंतिम उपाय” के तौर पर ही इस्तेमाल करना चाहिए। जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि सीबीआई जांच का आदेश तभी दिया जा सकता है, जब यह साबित हो जाए कि राज्य पुलिस जांच की निष्पक्षता या पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि सिर्फ राज्य पुलिस पर अविश्वास जताने से सीबीआई जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का आदेश रद्द
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें उत्तर प्रदेश विधान परिषद के कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी की सीबीआई जांच के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने कहा कि सीबीआई जांच केवल असाधारण परिस्थितियों में ही जरूरी होती है — जब मामले की जटिलता अधिक हो, राष्ट्रीय प्रभाव पड़ता हो, या निष्पक्ष जांच की संभावना राज्य स्तर पर न दिख रही हो। कोर्ट ने यह भी दोहराया कि केवल किसी पक्ष के आरोप लगाने से सीबीआई जांच नहीं दी जा सकती, जब तक इसके समर्थन में ठोस साक्ष्य न हों।
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CBI पर अनावश्यक बोझ न डालें अदालतें’
शीर्ष अदालत ने कहा कि सीबीआई जैसी एजेंसी पर अनावश्यक जांच का बोझ नहीं डालना चाहिए, क्योंकि उसका काम केवल असाधारण मामलों की जांच करना है। कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक अदालतों को “न्यायिक संयम” दिखाना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सीबीआई जांच का आदेश तभी दिया जाए जब वास्तव में अन्य सभी विकल्प विफल हो जाएं। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी भविष्य में अदालतों द्वारा सीबीआई जांच के आदेश देने के मामलों में एक अहम दिशानिर्देश मानी जा रही है।