SC ST Act Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के कुछ प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह कानून एक वर्ग को सुरक्षा देने के साथ-साथ दूसरे वर्ग के उत्पीड़न का कारण बन सकता है। हालांकि अदालत ने कहा कि कानून में आरोपियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त कानूनी उपाय पहले से मौजूद हैं।
याचिकाकर्ता ने क्या दलील दी?
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि बिना प्रारंभिक जांच के एफआईआर दर्ज करने और गिरफ्तारी की व्यवस्था से कानून के दुरुपयोग की आशंका बढ़ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि अधिनियम की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर रोक होने से आरोपियों को कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
मुआवजे के प्रावधान पर भी उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष ने शिकायतकर्ताओं को मुकदमे की शुरुआत में ही मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उन्होंने दावा किया कि इससे झूठी शिकायतों को बढ़ावा मिल सकता है। इस दलील पर जस्टिस जोयमाल्या बागची ने आपत्ति जताते हुए इसे "क्रूर" टिप्पणी बताया और इस तर्क से असहमति जताई।
ये भी पढ़ें : ED की बड़ी कार्रवाई से मचा हड़कंप, Punjab-Haryana में कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
कोर्ट ने पुराने फैसले का दिया हवाला
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा कि वर्ष 2020 में सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस कानून की संवैधानिक वैधता को बरकरार रख चुका है। अदालत ने कहा कि केवल छह साल बाद उसी मुद्दे पर फिर से विचार करने का कोई ठोस आधार दिखाई नहीं देता।
2018 और 2020 के फैसलों का जिक्र
साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में गिरफ्तारी से पहले मंजूरी और एफआईआर से पहले प्रारंभिक जांच जैसे सुरक्षा उपाय सुझाए थे। उस फैसले का व्यापक विरोध हुआ था। इसके बाद संसद ने कानून में संशोधन करते हुए धारा 18ए जोड़ी, जिसमें स्पष्ट किया गया कि एफआईआर से पहले प्रारंभिक जांच और गिरफ्तारी के लिए पूर्व मंजूरी आवश्यक नहीं होगी।
फिलहाल कानून यथावत रहेगा
सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2020 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून की वैधता पहले ही तय की जा चुकी है। इसलिए इस चरण में दोबारा समीक्षा की जरूरत नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद फिलहाल एससी-एसटी एक्ट के मौजूदा प्रावधान यथावत लागू रहेंगे।