Supreme Court Private Universities: देशभर की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को मुनाफा कमाने वाली संस्था के रूप में संचालित नहीं किया जा सकता है। शिक्षा का मकसद समाज सेवा और जिम्मेदारी से संस्थान चलाना होना चाहिए, न कि मोटी कमाई करना। बेंच ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों से कई अहम जानकारियां सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
‘देश भर की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज कैसे चल रही’
बता दें जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी से जुड़े एक छात्र की शिकायत पर सुनवाई करते हुए इस मामले का दायरा पूरे देश में फैला दिया। कोर्ट ने कहा कि जनहित में यह जानना जरूरी है कि देश भर की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज कैसे चल रही है। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों के पास संस्थान के सुचारू संचालन और संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन के लिए उचित वित्तीय भंडार हो सकता है, लेकिन शिक्षा के लिए उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा से असंबंधित उद्देश्यों के लिए नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने विश्वविद्यालयों से क्या-क्या जानकारी मांगी
अदालत ने देश की सभी प्राइवेज यूनिवर्सिटीज को पिछले 5 सालों का पूरा लेखा-जोखा जमा करने का निर्देश दिया है। इनमें संस्थान की अर्जित और खर्च की गई धनराशि, शिक्षा से सीधे जुड़े नहीं होने वाले व्यक्तियों को किए गए भुगतान, बची हुई धनराशि और उसके निवेश का पूरा विवरण शामिल होगा।
फीस का पूरा ब्योरा
कोर्ट ने एडमिशन फीस, कोर्स फीस के अलावा विकास शुल्क और स्पेशल प्रोग्राम के नाम पर छात्रों से वसूले गिए एक-एक रूपये का हिसाब मांगा है। इसके अलावा यूनिवर्सिटी के पास कुल फंड बचा है, उस अतिरिक्त पैसे को कहां और कैसे इन्वेस्ट किया गया है, इसकी भी जानकारी मांगी गई है।
सरकारी सुविधाएं
सुप्रीम कोर्ट ने निजी विश्वविद्यालयों से ये बताने को कहा है उन्हें केंद्र या राज्य सरकारों से जमीन के आवंटन, कानूनों में छूट या किसी अन्य विशेष सुविधा के रूप में क्या-क्या लाभ मिला। इसके अलावा शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती की प्रक्रिया, उनके वेतन और अन्य सुविधाओं तथा भुगतान की व्यवस्था का पूरा विवरण मांगा है।
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शिकायत निवारण प्रणाली
विश्वविद्यालयों को कोर्ट को ये भी बताना होगा कि शिक्षकों की सेवा शर्तें क्या हैं और कक्षाएं आवंटित करने का अधिकार किस अधिकारी के पास है। पिछले 3 सालों में छात्रों की कितनी शिकायतें आईं और उन पर क्या कार्रवाई हुई, जनवरी 2025 से अब तक प्रत्येक शिक्षक को कितनी क्लास आवंटित की गईं, वास्तव में कितनी कक्षाएं उन्होंने लीं और यदि किसी शिक्षक ने कक्षाएं नहीं लीं तो विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक क्या व्यवस्था की गई है।
अस्पतालों का पूरा ब्योरा मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने जिन यूनिवर्सिटीज में मेडिकल की पढ़ाई होती है, उनसे जुड़े अस्पतालों का पूरा ब्योरा भी मांगा है। अदालत ने विश्वविद्यालय और अस्पताल के बीच संबंध और अस्पताल की भूमिका का विवरण देने को कहा है।
सरकार और राज्यों को दिए गए निर्देश
अदालत ने केंद्र सरकार, राज्य सरकार और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि वे अपने मुख्य सचिवों के माध्यम से संबंधित यूनिवर्सिटीज से यह जानकारी जुटाएं और 6 हफ्ते के अंदर हलफनामा दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को तय की गई है।