सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में हाथियों के सुरक्षित और निर्बाध आवागमन को लेकर केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। सोमवार को हुई सुनवाई में कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सभी राज्यों में हाथी कॉरिडोर का नया सर्वे कराने और विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि फसलों को होने वाले नुकसान का हवाला देकर हाथियों के प्राकृतिक रास्तों में स्थायी या कृत्रिम रुकावटें पैदा नहीं की जा सकतीं। अदालत ने कहा कि वन्यजीवों के आवागमन के रास्तों को सुरक्षित रखना जरूरी है और इसके लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
फसल नुकसान के नाम पर रास्ते रोकने पर आपत्ति
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हाथियों के झुंड लंबी दूरी तक आवाजाही करते हैं और उनके पारंपरिक रास्तों को बाधित करना उचित नहीं है। अदालत ने साफ किया कि किसी राज्य की ओर से केवल फसल बर्बाद होने को आधार बनाकर हाथियों के रास्ते में रुकावट डालने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने वन्यजीवों और मानव गतिविधियों के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए निर्धारित कॉरिडोर को बाधामुक्त रखने पर जोर दिया।
केंद्र को नया सर्वे कराने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को देश के अलग-अलग राज्यों में मौजूद हाथी कॉरिडोर की वर्तमान स्थिति का नए सिरे से आकलन करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि सर्वे में यह भी स्पष्ट किया जाए कि किन स्थानों पर हाथियों की आवाजाही में बाधाएं मौजूद हैं और उन्हें दूर करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। केंद्र को विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट के जरिए अदालत को अपनी पहल और कार्रवाई की जानकारी देनी होगी।
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जबरदस्ती और हथियारों के इस्तेमाल पर भी मांगी जानकारी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात भी रखी गई कि हाथियों को कई बार भीड़ की तरह खदेड़ने की कोशिश की जाती है, जिससे परिस्थितियां और खराब हो सकती हैं। वकील ने हाथियों को भगाने के दौरान हथियारों के इस्तेमाल को रोकने की जरूरत बताई। उन्होंने ‘हुल्ला पार्टियों’ जैसी व्यवस्थाओं पर भी नियंत्रण की आवश्यकता जताई। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए उचित उपाय किए जाएं और उनकी जानकारी स्टेटस रिपोर्ट में शामिल की जाए।
छह सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाथी कॉरिडोर में किसी भी तरह की बाधा वन्यजीवों की स्वाभाविक आवाजाही को प्रभावित कर सकती है। इसलिए केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों को आवश्यक कदम उठाने होंगे। अदालत ने मंत्रालय से नए सर्वे के आधार पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें कॉरिडोर की स्थिति, मौजूद रुकावटें और उन्हें दूर करने के उपायों का उल्लेख होगा। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी।