Navodaya Vidyalaya controversy: जवाहर नवोदय विद्यालयों को लेकर तमिलनाडु सरकार और केंद्र के बीच चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य की ओर से वकील पी. विल्सन ने कहा कि नवोदय विद्यालय तीन-भाषा नीति का पालन करते हैं, जबकि तमिलनाडु में कानूनी तौर पर दो-भाषा प्रणाली लागू है। इस पर जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने स्पष्ट कहा कि इस मामले को भाषा विवाद का रूप नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय व्यवस्था है और सभी को मिलकर समाधान निकालना चाहिए।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह भी दलील दी कि प्रत्येक जिले में लगभग 30 एकड़ भूमि उपलब्ध कराना और उससे जुड़ा खर्च उठाना राज्य पर अतिरिक्त बोझ है। इसके साथ ही केंद्र पर समग्र शिक्षा अभियान के तहत बड़ी राशि बकाया होने का आरोप लगाया गया। कोर्ट ने टकराव की बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की सलाह दी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि यह मुद्दा हिंदी या किसी अन्य भाषा का नहीं, बल्कि ग्रामीण छात्रों को शिक्षा से जोड़ने का है।
यह भी देखेंःBefore Sydney Aattack: सिडनी हमले से पहले दिखा चेतावनी संकेत, क्या बताता है लाल उल्टा त्रिकोण?
कोर्ट ने दोनों पक्षों को मीडिया के जरिए बयानबाजी से बचने और सीधे बातचीत करने की नसीहत दी। जजों ने सुझाव दिया कि राज्य परामर्श के दौरान अपनी शर्तें, जैसे दो-भाषा नीति और वित्तीय मुद्दे, सामने रख सकता है, जिन पर केंद्र विचार करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि छात्रों के शिक्षा के अधिकार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और किसी भी प्रशासनिक या राजनीतिक मतभेद की वजह से बच्चों का भविष्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।