Airfares During Festivals: सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों के दौरान निजी एयरलाइंस द्वारा हवाई किराए में अचानक बढ़ोतरी और अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से इस विषय पर विस्तृत विचार कर औपचारिक जवाब दाखिल करने को कहा है। यह मामला एक जनहित याचिका के माध्यम से अदालत के सामने आया, जिसमें अनियमित और अत्यधिक किराया वृद्धि पर नियंत्रण के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग की गई है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि त्योहारों के मौसम में किराए और अतिरिक्त शुल्क में भारी उतार-चढ़ाव गंभीर चिंता का विषय है। अदालत ने संकेत दिया कि यह मुद्दा संवैधानिक अधिकारों से भी जुड़ सकता है, इसलिए इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
आर्टिकल 32 के तहत सुनवाई
याचिका में कहा गया है कि एयरलाइंस द्वारा अपनाई जा रही डायनामिक प्राइसिंग व्यवस्था के कारण टिकट के दाम दिन में कई बार बदलते हैं। इससे आम यात्रियों, खासकर मध्यम वर्ग और आपात परिस्थितियों में यात्रा करने वालों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। अदालत ने माना कि मामला विचारणीय है और इस पर विस्तृत जवाब जरूरी है।
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केंद्र से चार हफ्ते का समय
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को बताया कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय स्तर पर इस मुद्दे की समीक्षा की जा रही है। सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख निर्धारित कर दी।
आगे की प्रक्रिया
सुनवाई के दौरान एयरलाइंस से जुड़े संगठन ने भी पक्ष रखने की अनुमति मांगी, लेकिन अदालत ने फिलहाल इसे टाल दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले कार्यपालिका इस पर निर्णय ले। यदि आवश्यक हुआ तो न्यायालय आगे हस्तक्षेप पर विचार करेगा। अब सभी की नजर केंद्र सरकार के जवाब और संभावित नियामक कदमों पर है।