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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश पूर्व राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर दिया गया है। स्वामी ने अपनी याचिका में आग्रह किया था कि केंद्र सरकार को जल्द से जल्द इस संबंध में निर्णय लेने का निर्देश दिया जाए। इस पर जस्टिस विक्रमनाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया और कहा कि इस मामले पर चार हफ्ते में जवाब दाखिल किया जाए।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व का प्रतीक रामसेतु
रामसेतु तमिलनाडु के पंबन द्वीप से श्रीलंका के मन्नार द्वीप तक फैली चूना पत्थर की श्रृंखला है। इसे ‘एडम ब्रिज’ के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम की वानर सेना ने लंका तक पहुंचने के लिए इसी पुल का निर्माण किया था। वैज्ञानिक शोधों में भी यह दावा किया गया है कि रामसेतु प्राकृतिक नहीं बल्कि मानवनिर्मित ढांचा हो सकता है। इसके ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए लंबे समय से इसे राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग उठ रही है।
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यूपीए सरकार के प्रोजेक्ट से जुड़ा विवाद
रामसेतु को लेकर विवाद उस समय और गहरा गया था जब यूपीए सरकार ने ‘सेतु समुद्रम शिप कैनाल प्रोजेक्ट’ शुरू किया था। इस प्रोजेक्ट का मार्ग रामसेतु से होकर गुजरना था, जिस पर आपत्ति जताई गई और मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। वर्ष 2007 में शीर्ष अदालत ने इस प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद केंद्र ने आश्वासन दिया कि रामसेतु को नुकसान पहुंचाए बिना वैकल्पिक मार्ग तलाशा जाएगा। अब फिर से यह मुद्दा अदालत में उठने से रामसेतु को राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा मिलने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।