Supreme Court Action on pollution: दिल्ली-एनसीआर में गंभीर होते प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को प्रदूषण संबंधी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए तीन जजों की पीठ ने दिल्ली में टोल प्लाजा की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि टोल प्लाजा पर वाहनों की लंबी कतारें लगती हैं, जिससे न केवल ट्रैफिक जाम बढ़ता है बल्कि प्रदूषण और उत्सर्जन भी अधिक होता है। अदालत ने इस स्थिति को जनस्वास्थ्य से जोड़ते हुए दिल्ली नगर निगम (MCD) को निर्देश दिया कि वह राजधानी में मौजूद 9 टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से निलंबित करने की संभावना पर विचार करे। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस पर एक सप्ताह के भीतर फैसला लिया जाए और उसे रिकॉर्ड पर रखा जाए। सुनवाई के दौरान गुड़गांव रोड के जाम का जिक्र करते हुए कोर्ट ने कहा कि भारी ट्रैफिक के कारण लोग सामाजिक कार्यक्रमों तक में नहीं पहुंच पाते, जो शहरी जीवन की गंभीर समस्या बन चुकी है।
टोल और प्रदूषण पर कड़ा रुख
अदालत ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगले वर्ष से अक्टूबर से जनवरी तक, यानी सबसे ज्यादा प्रदूषण वाले महीनों में, दिल्ली में टोल वसूली पूरी तरह बंद करने की ठोस योजना पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतने जहरीले माहौल में टोल से होने वाली आय प्राथमिकता नहीं हो सकती। साथ ही, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से यह भी कहा गया कि वह टोल प्लाजा को शहर की सीमाओं से दूर स्थानांतरित करने की संभावना पर विचार करे, ताकि ट्रैफिक का दबाव कम हो। अदालत ने सुझाव दिया कि टोल प्लाजा 5–10 किलोमीटर की बजाय 50 किलोमीटर की दूरी पर हों, जिससे शहर के भीतर प्रदूषण घटाया जा सके।
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स्कूल बंद और बच्चों की सुरक्षा पर बहस
सुनवाई के दौरान स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद करने के मुद्दे पर भी विस्तार से चर्चा हुई। वरिष्ठ वकीलों ने बच्चों की सेहत, मिड-डे मील योजना और ऑनलाइन या हाइब्रिड पढ़ाई जैसे विकल्पों पर अपनी दलीलें रखीं। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्कूल बंद करने जैसे फैसले अस्थायी और नीतिगत होते हैं, जिनमें अदालत को सीमित हस्तक्षेप करना चाहिए। कोर्ट ने माना कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों सभी को एक ही प्रदूषण समस्या का सामना करना पड़ रहा है, जिसका समाधान केवल दीर्घकालिक नीतियों से ही संभव है। अंत में सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल बंद रखने के फैसले में दखल देने से इनकार करते हुए संबंधित प्राधिकरणों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया और साफ किया कि प्रदूषण से निपटने के लिए स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम जरूरी हैं।