
Supreme Court to Election Commission: सुप्रीम कोर्ट में बिहार की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग से कहा कि वह मतदाताओं से जुड़े तथ्यों और आंकड़ों पर सवालों के जवाब देने के लिए तैयार रहे। इस मामले में कोर्ट ने 12 और 13 अगस्त को सुनवाई तय की थी। चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट किया था कि कानून के तहत मसौदा सूची से गायब नामों की अलग सूची बनाना या हटाए जाने के कारणों को सार्वजनिक करना आवश्यक नहीं है। आयोग का कहना है कि इस तरह के बड़े स्तर के अभ्यास में कुछ खामियां आना स्वाभाविक है।
बिहार में एसआईआर की प्रमुख गणना के नतीजे
चुनाव आयोग के अनुसार 24 जून तक बिहार में कुल 7.89 करोड़ पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 91.69% यानी 7.24 करोड़ मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा किए। गणना चरण में 22 लाख मतदाता मृत पाए गए, जबकि 36 लाख लोग स्थायी रूप से स्थानांतरित हुए या अनुपलब्ध मिले। इसके अलावा सात लाख मतदाता ऐसे भी थे जिनके नाम कई स्थानों पर दर्ज थे। आयोग ने बताया कि अब तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए 10,570 व्यक्तिगत आवेदन प्राप्त हुए हैं।
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कांग्रेस के आरोपों पर आयोग का जवाब
विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए चुनाव आयोग ने कहा कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने मसौदा सूची को लेकर आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, जबकि 11 दिन बीत चुके हैं। आयोग ने कांग्रेस और राहुल गांधी द्वारा लगाए गए वोट चोरी के आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। सोशल मीडिया पर जारी फैक्ट चेक में आयोग ने पारदर्शिता के सबूत साझा किए, जिनमें राजद, कांग्रेस और भाकपा जैसे दलों के प्रतिनिधियों के वीडियो साक्ष्य और उनके साथ हुई बैठकों का विवरण शामिल है।