Surya Grahan 2026: साल का आखिरी सूर्य ग्रहण आज यानी 12 अगस्त को लगने जा रहा है। यह 2026 का एकमात्र पूर्ण सूर्य ग्रहण है और खगोलीय लिहाज से भी इसे खास घटना माना जा रहा है। हिंदू धर्म में सूर्य को देवता का दर्जा दिया गया है। उन्हें ऊर्जा, प्रकाश और जीवन का आधार माना जाता है। इसलिए सूर्य ग्रहण को लेकर धार्मिक मान्यताएं भी काफी प्रचलित हैं। मान्यता के अनुसार, ग्रहण के दौरान ईश्वर का ध्यान और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। वहीं, ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान, साफ-सफाई और दान-पुण्य करने की परंपरा है। इस बार सूर्य ग्रहण को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। यह कितने बजे शुरू होगा? क्या भारत में इसे देखा जा सकेगा? यहां सूतक मान्य होगा या नहीं? ग्रहण के समय पूजा-पाठ करना चाहिए या नहीं? तो आइए इन सभी सवालों के जवाब जानते हैं।
हरियाली अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण
12 अगस्त को हरियाली अमावस्या भी मनाई जा रही है। ऐसे में अमावस्या और सूर्य ग्रहण का यह संयोग इसे और खास बना रहा है। बताया जाता है कि करीब 18 साल पहले यानी 2008 में श्रावण अमावस्या के दिन सूर्य ग्रहण पड़ा था। इस वजह से इस संयोग को लेकर भी लोगों में खास उत्सुकता है।
किन देशों में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण?
12 अगस्त का पूर्ण सूर्य ग्रहण सबसे पहले उत्तरी रूस के आसमान में दिखाई देगा। इसके बाद ग्रहण का मार्ग ग्रीनलैंड और आइसलैंड से होते हुए यूरोप के कुछ हिस्सों तक पहुंचेगा। स्पेन और पुर्तगाल के उत्तरी-पूर्वी इलाकों में भी इसे देखा जा सकेगा। स्पेन में ओवीडो से लेकर मलोर्का द्वीप तक ग्रहण का प्रभाव दिखाई देने की बात कही जा रही है। इसके अलावा यूरोप के कई देशों, कनाडा, अमेरिका के उत्तरी हिस्सों और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका में सूर्य ग्रहण का आंशिक रूप देखने को मिलेगा।
भारत में किस समय लगेगा सूर्य ग्रहण?
भारतीय समय के मुताबिक ग्रहण 12 अगस्त की रात 9:04 बजे शुरू होगा और 13 अगस्त की रात 1:27 बजे तक चलेगा। इस तरह इसकी कुल अवधि करीब 4 घंटे 23 मिनट होगी। चूंकि ग्रहण के दौरान भारत में रात होगी, इसलिए यह खगोलीय घटना देश से दिखाई नहीं देगी।
किस राशि और नक्षत्र में होगा ग्रहण?
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण कर्क राशि और अश्लेषा नक्षत्र में लगेगा। ज्योतिष में ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है और इसकी स्थिति का अलग-अलग राशियों पर अलग प्रभाव बताया जाता है। हालांकि, किसी व्यक्ति पर ग्रहण का प्रभाव उसकी पूरी कुंडली और अन्य ग्रहों की स्थिति के आधार पर देखा जाता है।
भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं?
सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देने के कारण यहां सूतक काल मान्य नहीं होगा। सामान्य तौर पर सूतक को उस क्षेत्र में माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। इसका मतलब है कि भारत में मंदिरों के कपाट बंद रखने या सामान्य खान-पान रोकने जैसी परंपराओं को इस ग्रहण के लिए लागू नहीं माना जाएगा। लोग अपने सामान्य धार्मिक और दैनिक कार्य कर सकते हैं।
सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय भगवान का स्मरण और मंत्र जाप करना शुभ माना जाता है। इस दौरान सूर्य देव से जुड़े मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।चूंकि इस दिन हरियाली अमावस्या भी है, इसलिए जरूरतमंद लोगों की मदद और दान-पुण्य करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। अपनी क्षमता के अनुसार तिल, चावल, आटा, चीनी, दूध, कपड़े, अनाज या धन का दान किया जा सकता है। हरियाली अमावस्या पर पौधारोपण करना भी धार्मिक परंपरा में शुभ माना जाता है।
सूतक काल में किन कामों से बचें
जिन स्थानों पर सूतक मान्य होता है, वहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार शुभ कार्यों को रोक दिया जाता है। इस दौरान पूजा स्थल या देवी-देवताओं की मूर्तियों को छूने से भी बचने की मान्यता है। कुछ परंपराओं में सूतक के दौरान भोजन तैयार करने, सब्जियां काटने और अन्य सामान्य गतिविधियों को लेकर भी नियम बताए गए हैं। गर्भवती महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। हालांकि, इन नियमों का पालन स्थानीय परंपरा और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार किया जाता है।
64 साल बाद फिर दिखेगा ऐसा नजारा?
इस सूर्य ग्रहण को खगोलीय लिहाज से भी खास बताया जा रहा है। पूर्ण ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य के सामने आकर उसके बड़े हिस्से को ढक लेगा। जिस क्षेत्र से पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा, वहां दिन के समय कुछ देर के लिए अंधेरा छाने जैसा दृश्य बन सकता है। बताया जा रहा है कि चंद्रमा सूर्य के लगभग 90 फीसदी हिस्से को ढक सकता है। इसी तरह का नजारा दोबारा देखने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर ग्रहण की दृश्यता और पूर्णता अलग हो सकती है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. loksatya इसकी पुष्टि नहीं करता है।