भारतीय टी20 टीम के कप्तान सूर्यकुमार यादव एक बार फिर अपने खराब फॉर्म को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। अहमदाबाद की एक यूनिवर्सिटी में छात्रों से बातचीत के दौरान उन्होंने अपने संघर्ष और सोच को बेहद सीधे शब्दों में रखा। सूर्यकुमार ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी का करियर हमेशा सुनहरा नहीं रहता और बुरा समय सीखने का हिस्सा होता है। उनके मुताबिक, उतार-चढ़ाव से गुजरना कमजोरी नहीं बल्कि आगे मजबूत बनने की प्रक्रिया है।
बयान जिसने ध्यान खींचा
इस बातचीत में सूर्यकुमार का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। उन्होंने कहा कि फिलहाल टीम के बाकी खिलाड़ी उनका साथ दे रहे हैं और उन्हें भरोसा है कि जिस दिन उनका खेल खुला, असर सब देखेंगे। कुछ लोगों ने इस बात को जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास बताया, जबकि समर्थकों का कहना है कि यही एक कप्तान का खुद पर भरोसा होता है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनके आंकड़े सवाल खड़े कर रहे हैं।
पढ़ाई से दी मिसाल
अपने संघर्ष को आसान भाषा में समझाते हुए सूर्यकुमार ने छात्र जीवन की तुलना दी। उन्होंने कहा कि अगर परीक्षा में कम नंबर आते हैं तो कोई पढ़ाई छोड़ नहीं देता, बल्कि और मेहनत करता है। उसी तरह खिलाड़ी भी खराब दौर में खेल छोड़ने के बजाय खुद पर काम करता है। सूर्यकुमार का कहना है कि वह इसी रास्ते पर हैं और जल्द ही बेहतर प्रदर्शन के साथ वापसी करना चाहते हैं। यह सोच उनके अनुभव और मानसिक मजबूती को दिखाती है।
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आंकड़े और आगे की राह
साल 2025 टी20 इंटरनेशनल में सूर्यकुमार के लिए कठिन रहा है। 19 पारियों में वह 218 रन ही बना सके, औसत और स्ट्राइक रेट दोनों उम्मीद से कम रहे। एशिया कप और घरेलू सीरीज में भी उनका बल्ला खामोश रहा। इसके बावजूद चयनकर्ताओं ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें टीम में बनाए रखा, जबकि उपकप्तान शुभमन गिल को बाहर होना पड़ा। टीम के भीतर भी उन्हें समर्थन मिल रहा है और साथी खिलाड़ी मानते हैं कि सूर्यकुमार सिर्फ एक अच्छी पारी दूर हैं। अब न्यूजीलैंड के खिलाफ आने वाली टी20 सीरीज उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा मौका होगी, जहां यह साफ होगा कि भरोसा रंग लाता है या दबाव बढ़ता है।