शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल चुनाव में बीजेपी की सबसे बड़ी जीत का चेहरा बनकर उभरे हैं। बीजेपी पहली बार बंगाल में सरकार बनाने जा रही है और ऐसे में शुभेंदु अधिकारी का नाम मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। इस चुनाव में उन्होंने दो सीटों भवानीपुर और नंदीग्राम से चुनाव लड़ा था। सबसे खास बात यह रही कि दोनों ही सीटों पर उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। अब सरकार गठन की तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है कि शुभेंदु आखिर कौन सी सीट अपने पास रखेंगे और किस सीट से इस्तीफा देंगे।
नंदीग्राम फिर बना चर्चा का केंद्र
नंदीग्राम सीट एक बार फिर बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। शुभेंदु अधिकारी ने यहां टीएमसी उम्मीदवार पवित्र कर को 9 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। उन्हें 1 लाख 27 हजार से ज्यादा वोट मिले जबकि पवित्र कर 1 लाख 17 हजार वोटों तक ही पहुंच सके। नंदीग्राम वही सीट है जहां 2021 के चुनाव में शुभेंदु ने ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया था। यही वजह है कि इस सीट को बीजेपी के लिए बेहद प्रतिष्ठित माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नंदीग्राम का जनादेश हमेशा बंगाल की राजनीति की दिशा तय करता रहा है।
भवानीपुर में टीएमसी का किला ढहा
इस चुनाव में भवानीपुर सीट सबसे ज्यादा चर्चा में रही। लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को 15 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर बड़ा उलटफेर कर दिया। 2021 में नंदीग्राम हारने के बाद ममता बनर्जी भवानीपुर से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी थीं लेकिन इस बार यही सीट उनके लिए सबसे बड़ा झटका बन गई। बीजेपी इस जीत को बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव के तौर पर देख रही है। भवानीपुर की जीत ने शुभेंदु अधिकारी की ताकत को और ज्यादा बढ़ा दिया है।
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सीएम की रेस में सबसे आगे
बीजेपी विधायक दल की बैठक से पहले ही शुभेंदु अधिकारी को मुख्यमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पार्टी नेतृत्व भी उन्हें बंगाल में सबसे बड़ा चेहरा मान रहा है। सूत्रों के मुताबिक बीजेपी बंगाल में बड़ा सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री के साथ दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा भी तेज है। माना जा रहा है कि पार्टी बंगाल में महिला और मतुआ समुदाय को भी बड़ा प्रतिनिधित्व दे सकती है।
कौन सी सीट छोड़ सकते हैं
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शुभेंदु अधिकारी नंदीग्राम सीट छोड़ सकते हैं और भवानीपुर को अपने पास रख सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि उन्होंने टीएमसी के सबसे मजबूत गढ़ में ममता बनर्जी को हराकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। भवानीपुर में जीत का अंतर भी नंदीग्राम से ज्यादा रहा है। हालांकि कुछ नेताओं का मानना है कि शुभेंदु नंदीग्राम जैसी प्रतिष्ठित सीट को छोड़ना नहीं चाहेंगे क्योंकि यही सीट उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान बनी हुई है।
अंतिम फैसले पर टिकी नजर
फिलहाल पूरे पश्चिम बंगाल की नजर अब शुभेंदु अधिकारी के अगले फैसले पर टिकी हुई है। मुख्यमंत्री पद की घोषणा और सीट छोड़ने को लेकर अगले कुछ घंटों में तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है। बीजेपी के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार चर्चा चल रही है। बंगाल की राजनीति में यह फैसला सिर्फ एक सीट का नहीं बल्कि आने वाले कई सालों की राजनीतिक दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।