इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक अंतिम आदेश नहीं आता, तब तक स्वामी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।
गिरफ्तारी पर अस्थायी रोक
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि स्वामी जांच में पूरा सहयोग करें। कोर्ट ने दोनों पक्षों से लिखित दलीलें दाखिल करने को कहा है। जज ने संकेत दिया कि निर्णय देने में अनावश्यक देरी नहीं की जाएगी और कोशिश रहेगी कि मार्च के तीसरे सप्ताह तक आदेश सुना दिया जाए।
पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज है मामला
यह मामला नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण से जुड़ा है और पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किया गया है। एफआईआर के बाद स्वामी और उनके एक शिष्य ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। मामला गंभीर होने के कारण इस पर कानूनी नजरें टिकी हुई हैं।
आरोपों को बताया निराधार
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि यह मामला साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि जिन बच्चों का नाम सामने आया, वे संबंधित संस्थान में पढ़ते ही नहीं थे। उनके अनुसार यह तथ्य सरकार की ओर से भी स्वीकार किया गया है।
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बच्चों की सुरक्षा पर कोर्ट की टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत ने बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर भी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि बच्चों को उचित संरक्षण में रखा जाए, ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके। इससे न्याय प्रक्रिया में भरोसा बनाए रखने की बात कही गई।
अब फैसले का इंतजार
फिलहाल स्वामी को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है। हाईकोर्ट का निर्णय आने के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी। इस मामले पर समाज और समर्थकों की नजर बनी हुई है, क्योंकि आगे का आदेश ही तय करेगा कि कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में जाएगी।