दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दो साल की कैद की सजा सुनाई है। अदालत ने उन्हें दंगा भड़काने में मदद करने का दोषी माना। ताहिर हुसैन को इससे पहले भी दिल्ली दंगों से जुड़े एक अन्य मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है।
जनप्रतिनिधि होने के नाते शांति बनाए रखने की थी जिम्मेदारी
अदालत ने कहा कि ताहिर हुसैन एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि थे, इसलिए उनसे लोगों को शांत रखने और हिंसा रोकने की अपेक्षा की जाती थी। कोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने घर का इस्तेमाल दंगाइयों को हमले करने में मदद पहुंचाने के लिए होने दिया।
अंकित शर्मा हत्याकांड में पहले ही हो चुकी है उम्रकैद
ताहिर हुसैन को दिल्ली दंगों से जुड़े मामलों में दूसरी बार सजा सुनाई गई है। इससे पहले इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में उन्हें उम्रकैद की सजा मिली थी। फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे।
अदालत ने दोषी की भूमिका को बताया गंभीर
अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष ताहिर हुसैन की दंगों में सक्रिय भागीदारी साबित नहीं कर पाया, लेकिन इससे उनके कृत्य की गंभीरता कम नहीं होती। कोर्ट के अनुसार, दंगाइयों को अपने घर का इस्तेमाल करने देना भी गंभीर अपराध है। अदालत ने 10 अक्टूबर को इस मामले में उन्हें दोषी ठहराया था, जबकि अन्य सभी आरोपियों को बरी कर दिया था।
दुकान में लूटपाट और आगजनी की दर्ज हुई थी शिकायत
शिकायतकर्ता इरशाद अली ने आरोप लगाया था कि 24 फरवरी 2020 को उनकी दुकान में लूटपाट कर आग लगा दी गई। उनके मुताबिक, करीब 17 से 18 लाख रुपये का सामान चोरी हुआ और 10 लाख रुपये की संपत्ति को नुकसान पहुंचा। एक अन्य शिकायतकर्ता मोहम्मद जाहिद ने भी दंगाइयों द्वारा ताहिर हुसैन के समर्थन में नारे लगाए जाने की बात कही थी। इस मामले में दयालपुर थाने में IPC की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था।