तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम की जीत के बाद अब सरकार गठन की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसी बीच कांग्रेस ने बड़ा फैसला लेते हुए डीएमके के साथ अपना पुराना गठबंधन तोड़कर टीवीके को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है और भविष्य के समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
कांग्रेस ने रखा बड़ा संदेश
कांग्रेस ने साफ कहा है कि टीवीके के साथ उसका गठबंधन सिर्फ सरकार बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि स्थानीय निकाय चुनाव, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों में भी दोनों दल साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। कांग्रेस का कहना है कि तमिलनाडु की जनता ने एक धर्मनिरपेक्ष और जनकल्याणकारी सरकार के पक्ष में जनादेश दिया है और पार्टी उसी जनादेश का सम्मान कर रही है। इस फैसले को दक्षिण भारत की राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है।
बीजेपी सहयोगियों पर रखी शर्त
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने टीवीके को समर्थन देते हुए एक बड़ी शर्त भी रखी है। कांग्रेस के तमिलनाडु प्रभारी गिरीश चोडंकर ने कहा कि गठबंधन में भाजपा के किसी भी सहयोगी दल को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि कांग्रेस ऐसी किसी ताकत के साथ नहीं जाएगी जो संविधान और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में भरोसा नहीं रखती हो। हालांकि कांग्रेस ने यह भी साफ किया कि केंद्र स्तर पर वह इंडिया गठबंधन में डीएमके के साथ बनी रहेगी।
टीवीके मुख्यालय में बढ़ी हलचल
कांग्रेस के समर्थन के बाद टीवीके मुख्यालय में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक विजय ने कांग्रेस विधायकों का स्वागत किया और गठबंधन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार दोनों पार्टियां सामाजिक न्याय और संवैधानिक मूल्यों के एजेंडे पर साथ काम करेंगी। प्रेस रिलीज में पेरियार, कामराज और डॉ भीमराव आंबेडकर के विचारों को आगे बढ़ाने की बात भी कही गई है।
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भविष्य की राजनीति पर पड़ेगा असर
तमिलनाडु में कांग्रेस और टीवीके का साथ आना राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। लंबे समय से डीएमके के साथ रहने वाली कांग्रेस का यह फैसला आने वाले चुनावों पर भी असर डाल सकता है। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि विजय की बढ़ती लोकप्रियता और कांग्रेस के समर्थन से राज्य में नया राजनीतिक समीकरण बन सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई सरकार का गठन कब तक होता है और आने वाले समय में यह गठबंधन कितना मजबूत साबित होता है।