
बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के वरिष्ठ नेता तेजस्वी यादव मुश्किल में फंसते नज़र आ रहे हैं. उन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के आरोप में यूपी और महाराष्ट्र, दोनों जगह मुकदमे दर्ज हुए हैं. मामला सबसे पहले उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से सामने आया. यहां भाजपा महानगर अध्यक्ष शिल्पी गुप्ता की शिकायत पर सदर बाजार थाने में तेजस्वी यादव के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. शिकायत में कहा गया कि राजद के आधिकारिक एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट से शुक्रवार सुबह 6:58 बजे एक पोस्ट किया गया था. इस पोस्ट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर लगाकर उनके खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई. पोस्ट की कॉपी मुकदमे में साक्ष्य के रूप में जोड़ी गई है.
इसके बाद पटना स्थित राजद कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तेजस्वी यादव ने पीएम को ‘पॉकेटमार’ कह दिया. उन्होंने कहा कि देश को ‘पॉकेटमार प्रधानमंत्री’ नहीं चाहिए. भाजपा ने इस बयान को बेहद गंभीर बताया और आरोप लगाया कि इससे आम जनता की भावनाएं आहत हुई हैं. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत एफआईआर दर्ज की और जांच शुरू कर दी. शाहजहांपुर के एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मुकदमा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 353(2) और 197(1)(a) के तहत दर्ज किया गया है.
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महाराष्ट्र में भी दर्ज हुआ केस
तेजस्वी यादव की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके खिलाफ महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में भी केस दर्ज किया गया है. भाजपा विधायक मिलिंद नरोटे ने इस मामले में शिकायत दी थी. उनकी शिकायत के आधार पर तेजस्वी यादव पर कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया. इनमें भारतीय न्याय संहिता की धारा 196 (समुदायों के बीच दुश्मनी फैलाना), धारा 356 (मानहानि), धारा 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और धारा 353 (सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाला बयान) शामिल हैं.
दो राज्यों में जांच का सामना करेंगे तेजस्वी
अब तेजस्वी यादव को एक साथ दो राज्यों की पुलिस की जांच का सामना करना पड़ेगा. यूपी में मामला सोशल मीडिया पोस्ट और बयान से जुड़ा है, जबकि महाराष्ट्र में इसे जनभावनाओं को भड़काने और मानहानि से संबंधित माना गया है. भाजपा नेताओं का कहना है कि पीएम पर इस तरह की टिप्पणी केवल राजनीति के स्तर को गिराती है और जनता का अपमान करती है. यानी एक विवादित पोस्ट और बयान ने राजद नेता तेजस्वी यादव को कानूनी संकट में डाल दिया है. अब देखना होगा कि इस पूरे मामले में अदालत और जांच एजेंसियां आगे क्या कदम उठाती हैं.