
बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के बीच राजद नेता और महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार तेजस्वी यादव ने एक विवादित बयान दे दिया है. तेजस्वी यादव का कहना है कि अगर बिहार में महागठबंधन की सरकार बन जाती है, तो वे संसद द्वारा पारित वक्फ कानून को कूड़ेदान में फेंक देंगे. जिसके बाद अब उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है और इस पर समर्थक और विरोधी दोनों तरह के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया देना शुरू कर दिया है. अब सवाल ये उठता है कि क्या कोई राज्य सचमुच संसद के बनाए कानून को खत्म कर सकता है?
संसद के कानून को ही मिलेगी प्राथमिकता
दरअसल वक्फ कानून संसद द्वारा पारित एक केंद्रीय कानून है, जिसे देश के सभी राज्यों में लागू किया जाना अनिवार्य है. सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार दुबे के मुताबिक यह कानून संविधान की समवर्ती सूची (Concurrent List) में आता है. इसका मतलब है कि केंद्र और राज्य दोनों इस विषय पर कानून बना सकते हैं लेकिन अगर दोनों में टकराव हो जाता है, तो संसद का कानून ही प्राथमिकता पाएगा. इसलिए कोई भी राज्य सरकार इसे नकार या रद्द नहीं कर सकती है.
केंद्रीय कानून को खत्म नहीं कर सकती राज्य सरकारें
राज्य सरकारें केवल अपने वक्फ बोर्डों के प्रशासनिक कार्यों में बदलाव कर सकती हैं. इसके लिए राज्य सरकारें जरूरत के अनुसार नियमों में संशोधन या सुधार कर सकती हैं लेकिन केंद्रीय कानून को खत्म करने का अधिकार उनके पास बिल्कुल नहीं है. इसके साथ ही अगर राज्य सरकारें चाहें तो इस कानून को लागू करने में देरी कर सकती हैं, पर कानूनी रूप से देखा जाए तो इस तरह का कदम टिकाऊ नहीं होता है. इससे जुड़ा अगर कोई मामला अदालत में पहुंचता है, तो न्यायालय राज्य को कानून लागू करने का आदेश दे सकती है।
क्या कहता है संविधान?
भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में केंद्र और राज्यों के अधिकार तय कर दिए गए हैं. धार्मिक संस्थाओं और धर्मार्थ संपत्तियों से जुड़े विषय समवर्ती सूची की एंट्री नंबर 28 में सुरक्षित रखे गए हैं. वहीं संविधान के अनुच्छेद 254 के तहत अगर केंद्र और राज्य दोनों ने एक ही विषय पर कानून बनाया हो और दोनों में फर्क हो, तो संसद का कानून लागू रहेगा. राज्य का कानून तभी प्रभावी हो सकता है जब उसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाए, और तब भी संसद चाहे तो बाद में उसे बदल सकती है.
तेजस्वी ने चुनावी माहौल में की राजनीतिक बयानबाजी
वहीं दूसरी ओर तेजस्वी यादव का बयान चुनावी माहौल में दिया गया है, इसलिए इसे राजनीतिक बयानबाज़ी के रूप में ही देखा जा रहा है. कानूनी रूप से कोई भी राज्य सरकार संसद द्वारा पारित कानून को “कूड़ेदान में फेंक” नहीं सकती है. इसके साथ ही राज्य केवल राजनीतिक दबाव बनाकर केंद्र से कानून में बदलाव की मांग कर सकते हैं. इसलिए, यह कहना कि राज्य अपने स्तर पर वक्फ कानून को रद्द कर देगा, संवैधानिक रूप से नामुमकिन है.
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तेजस्वी की बयान राजनीति जुमले से कम नहीं
तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की राजनीति में नया रंग जरूर लेकर आ गया है, लेकिन संविधान और कानून की सीमाएं पूरी तरह से स्पष्ट हैं. किसी भी राज्य सरकार के पास संसद द्वारा पारित कानून को खत्म करने की शक्ति नहीं होती है. इसी वजह से यह बयान राजनीतिक जुमला ज्यादा और कानूनी सच्चाई कम माना जा रहा है.