Greenland escalates: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और यूरोप के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा ग्रीनलैंड में नाटो की सैन्य मौजूदगी की मांग किए जाने के बाद अमेरिकी खेमे से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। खासतौर पर दावोस में हुई टिप्पणियों ने इस मुद्दे को और गर्मा दिया है, जहां ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ मंत्री ने मैक्रों पर सीधा तंज कस दिया।
नाटो की एंट्री का प्रस्ताव
फ्रांस की ओर से कहा गया है कि ग्रीनलैंड में नाटो के सैन्य अभ्यास या अभियान की जरूरत है और इसमें फ्रांस पूरा योगदान देने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका की ओर से ग्रीनलैंड को लेकर दबाव की राजनीति तेज मानी जा रही है। मैक्रों का कहना है कि यूरोप को अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मुद्दों पर एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
ट्रंप के मंत्री का जवाब
दावोस में जब अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से इस मांग पर सवाल किया गया तो उन्होंने फ्रांस की आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि फ्रांस को पहले अपने खस्ताहाल बजट और घरेलू आर्थिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए। इस बयान को मैक्रों की नाटो मांग पर सीधा और सख्त जवाब माना जा रहा है।
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टैरिफ की धमकी
मैक्रों ने इससे पहले ट्रंप की उस चेतावनी की कड़ी आलोचना की थी, जिसमें ग्रीनलैंड मुद्दे पर विरोध करने की स्थिति में यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की बात कही गई थी। फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने इसे अनावश्यक आक्रामकता बताते हुए कहा था कि यूरोप किसी भी तरह की धमकी के आगे नहीं झुकेगा।
गठबंधन पर असर
ग्रीनलैंड विवाद को लेकर नाटो के भीतर भी बेचैनी बढ़ रही है। दावोस में मौजूद कई नाटो नेताओं ने आशंका जताई है कि इस मुद्दे पर बढ़ता टकराव गठबंधन की एकजुटता को नुकसान पहुंचा सकता है। हालिया बयानबाजी से साफ है कि ग्रीनलैंड अब सिर्फ एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि वैश्विक राजनीति का अहम केंद्र बन चुका है।