
Indian Army: भारतीय सेना की सुदर्शन चक्र कोर के तहत आने वाली शहबाज़ डिवीजन ने राजस्थान के थार मरुस्थल में बड़े स्तर पर एक्सरसाइज मरु ज्वाला युद्धाभ्यास शुरू किया है। यह अभ्यास चल रहे त्रि-सेवा अभ्यास त्रिशूल का अहम हिस्सा है। इस युद्धाभ्यास का उद्देश्य रेगिस्तानी वातावरण में सेना की मारक क्षमता, रणनीतिक तैयारी और संयुक्त युद्ध कौशल का मूल्यांकन करना है। सेना की विभिन्न इकाइयों के जवानों के साथ भारी सैन्य उपकरण भी इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं। यह अभियान भारत की बढ़ती सैन्य शक्ति और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऑपरेशनल तालमेल की परख
इस उच्च-स्तरीय युद्धाभ्यास में थलसेना के साथ वायुसेना और नौसेना का भी समन्वय देखा जा रहा है। मरु ज्वाला का मुख्य उद्देश्य थल, वायु और समुद्री क्षेत्रों में ऑपरेशनल तालमेल को मजबूत करना और नई तकनीक के जरिए संयुक्त कार्रवाई क्षमता को परखना है। सेना इस अभ्यास में मानवरहित प्रणालियों, नेटवर्क-आधारित फायरिंग सिस्टम और अत्याधुनिक डिजिटल सेंसर नेटवर्क का प्रयोग कर रही है, जिससे युद्ध क्षेत्र की रियल-टाइम निगरानी और त्वरित कार्रवाई संभव हो सके।
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
मरु ज्वाला को वर्ष 2025 के सुधार और तकनीकी आत्मनिर्भरता की थीम से जोड़ा गया है। यह अभ्यास दर्शाता है कि भारतीय सेना अब केवल पारंपरिक युद्ध नहीं, बल्कि भविष्य के मल्टी-डोमेन संघर्षों के लिए भी तैयार है। थार की तपती रेत में चल रहा यह अभ्यास आधुनिक तकनीक, सामरिक कौशल और अदम्य जोश का संगम है, जो यह साबित करता है कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में देश की सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम और तैयार है।