NEET Paper Leak: नीट-यूजी (NEET-UG) में हुई गड़बड़ी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए से पूछा कि ये गड़बड़ी कैसे हुई? सुप्रीम कोर्ट की तरफ से डॉ. राधाकृष्णन से भी सवाल किए गए, जिनकी अध्यक्षता में एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई थी। इस दौरान सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि कोर्ट के निर्देश के मुताबिक हलफनामा दाखिल कर दिया गया है।
"हम युवाओं को इस तरह निराश नहीं कर सकते"
सुनवाई के दौरान जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि युवाओं के साथ इस तरह का खिलवाड़ बेहद कष्टदायक है। कोर्ट ने कहा, "हम युवाओं को इस तरह निराश नहीं कर सकते।" यह उनके लिए बहुत बड़ा मानसिक तनाव है, क्योंकि इस परीक्षा के पीछे उनका बहुत सारा समय और भावनाएं दांव पर लगी होती हैं।
ऐसी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई?
सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए और डॉ. राधाकृष्णन से सवाल करते हुए पूछा कि आप शुरू से ही इस एक्सपर्ट कमेटी का हिस्सा थे, तो इन नियमों को लागू करने पर कितनी निगरानी रखी गई? तब भी ऐसी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई? कोर्ट ने आगे कहा कि जब पहले से हाई पावर्ड कमेटी बनाई गई थी और कई सिफारिशें लागू की जा चुकी हैं, तो इसका मतलब है कि या तो सिफारिशों में ही कोई कमी थी, या फिर उनकी ठीक से निगरानी नहीं की गई।
'री-नीट में रखा जाएगा विशेष ध्यान
सुनवाई के दौरान इसरो के पूर्व अध्यक्ष राधाकृष्णन ने कोर्ट को बताया कि कमेटी ने लॉन्ग टर्म के लिए 35 और शॉर्ट टर्म के लिए 60 सिफारिशें दी थीं। उन्होंने कहा कि इनमें से अधिकतर सुझावों को लागू भी कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एनटीए को और मजबूत बनाने की सलाह दी थी। उन्होंने माना कि मामला प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ का था, लेकिन कई सुधार लागू किए जा चुके हैं। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अगले महीने होने वाली री-नीट परीक्षा में इन सभी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा।
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'एनटीए को यूपीएससी से सीखने की जरूरत'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक असली जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक ऐसी घटनाएं रुकने वाली नहीं है। कोर्ट ने इस दौरान यूपीएससी का उदाहरण भी दिया। कोर्ट ने कहा कि यूपीएससी में कभी ऐसी स्थिति देखने को नहीं मिली, एनटीए को उससे सीखने की जरूर है।
2 जुलई से पहले हलफनामा करना होगा दाखिल
वहीं, जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि संबंधित मंत्रालय एक हलफनामा दाखिल करेगा। इसमें यह बताया जाएगा कि आगे से परीक्षाओं को किस तरह और किस प्रक्रिया के तहत पूरा कराया जाएगा। साथ ही, इसमें ये भी साफ करना होगा कि संस्था को ठीक तरीके से चलाने के लिए अनुभवी विशेषज्ञों की नियुक्ति और एक मजबूत सिस्टम कैसे तैयार किया जा रहा है। कोर्ट ने 2 जुलाई से पहले हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।