IndiGo flight cancellations: दिसंबर की शुरुआत में देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो द्वारा हजारों उड़ानें रद्द किए जाने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। लगभग हर बड़े एयरपोर्ट पर फ्लाइट कैंसिलेशन और घंटों की देरी देखने को मिली थी। इस पूरे मामले ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय और विमानन नियामक की चिंता बढ़ा दी थी। सरकार के निर्देश पर DGCA ने एक विशेष जांच समिति का गठन किया था, जिसने अब अपनी जांच पूरी कर गोपनीय रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट को फिलहाल सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इसके निष्कर्ष सामने आने लगे हैं।
जांच रिपोर्ट में क्या निकला, क्रू की कमी और तैयारी की चूक
सूत्रों के मुताबिक DGCA की जांच में सामने आया है कि इंडिगो नए क्रू ड्यूटी और रेस्ट नियमों को लागू करने के लिए समय पर तैयार नहीं थी। एयरलाइन पहले से ही क्रू मेंबर्स की कमी से जूझ रही थी, लेकिन इसके बावजूद उड़ानों की संख्या बढ़ाई गई। नतीजा यह हुआ कि नियम लागू होते ही बड़ी संख्या में फ्लाइट ऑपरेट करना संभव नहीं रहा और मजबूरी में हजारों उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। जांच समिति का नेतृत्व DGCA के संयुक्त महानिदेशक संजय के. ब्रह्मणे ने किया, जिन्होंने रिपोर्ट नियामक को सौंप दी है।
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सरकारी कार्रवाई क्या रही, यात्रियों पर पड़ा असर
फ्लाइट कैंसिलेशन को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने इंडिगो के खिलाफ सख्त कदम उठाए थे। एयरलाइन की करीब 10 प्रतिशत उड़ानें अस्थायी रूप से अन्य कंपनियों को देने का फैसला किया गया और इंडिगो के CEO को कारण बताओ नोटिस जारी हुआ। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि इंडिगो की लो-कॉस्ट रणनीति और सीमित संसाधन इस संकट की बड़ी वजह बने। अचानक हुई उड़ानों की रद्दीकरण से यात्रियों को टिकट रिफंड, वैकल्पिक यात्रा और समय की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिससे एयरलाइन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।