Three-day special session: संसद के 16 से 18 अप्रैल तक चलने वाले विशेष सत्र को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भले ही यह सत्र सिर्फ तीन दिन का है, लेकिन इसके असर दूरगामी हो सकते हैं। इस दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी, जो देश की राजनीति और सत्ता संतुलन को नए सिरे से परिभाषित कर सकते हैं।
महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी
केंद्र सरकार ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को 2029 तक लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। पहले यह योजना 2027 की जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होनी थी, लेकिन अब सरकार इसे जल्द लागू करने के लिए संविधान संशोधन, परिसीमन और यूनियन टेरिटरी से जुड़े तीन अहम बिल ला रही है।
सीटों का नया गणित और बड़ा बदलाव
प्रस्ताव के मुताबिक, लोकसभा की 543 सीटों को बढ़ाकर करीब 850 तक किया जा सकता है, जिसमें 33% यानी लगभग 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। इससे संसद का ढांचा और राजनीतिक समीकरण दोनों बदल सकते हैं। साथ ही SC-ST महिलाओं को भी इस आरक्षण में हिस्सा मिलेगा और सीटों का रोटेशन होगा।
संख्या बल और राजनीतिक चुनौती
संविधान संशोधन के लिए सरकार को विशेष बहुमत की जरूरत होगी। लोकसभा में NDA के पास करीब 292-293 सीटें हैं, जबकि करीब 362 वोट जरूरी होंगे। राज्यसभा में भी NDA बहुमत से पीछे है, जिससे साफ है कि सरकार को अन्य दलों का समर्थन जुटाना होगा।
परिसीमन पर दक्षिण राज्यों की चिंता
परिसीमन के मुद्दे पर दक्षिण भारत के राज्यों—तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक और तेलंगाना—ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें सीटों के मामले में नुकसान उठाना पड़ सकता है, जबकि उत्तर भारत का राजनीतिक प्रभाव बढ़ सकता है।
सहमति या टकराव?
विपक्ष जहां महिला आरक्षण का समर्थन कर रहा है, वहीं परिसीमन को लेकर सवाल उठा रहा है। सरकार इसे ‘नारी शक्ति’ को सशक्त करने का ऐतिहासिक कदम बता रही है। अब सबकी नजर संसद की बहस पर है, जहां तय होगा कि यह सत्र सहमति के साथ खत्म होगा या सियासी टकराव और बढ़ेगा।