Travel Insurance Tips : घूमने जाने की तैयारी में लोग टिकट, होटल और शॉपिंग का बजट तो बना लेते हैं, लेकिन ट्रैवल इंश्योरेंस को अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। विदेश में अचानक तबीयत बिगड़ने, अस्पताल में भर्ती होने या इमरजेंसी में भारत लौटने की नौबत आ जाए, तो लाखों रुपये खर्च हो सकते हैं। ऐसे में सही ट्रैवल इंश्योरेंस आर्थिक सुरक्षा दे सकता है। लेकिन पॉलिसी खरीदने से पहले यह जानना जरूरी है कि उसमें कौन-कौन सी सुविधाएं मिल रही हैं और किन परिस्थितियों में कंपनी खर्च नहीं उठाएगी।
विदेश यात्रा में मेडिकल कवर क्यों जरूरी?
विदेश में इलाज का खर्च कई बार बहुत ज्यादा हो सकता है। अस्पताल में भर्ती होने, डॉक्टर से परामर्श, जांच और एम्बुलेंस जैसी सुविधाओं पर बड़ी रकम खर्च हो सकती है। बजाज जनरल इंश्योरेंस के चीफ डिस्ट्रीब्यूशन ऑफिसर राकेश कौल के मुताबिक, अचानक मेडिकल इमरजेंसी आने पर इलाज और भारत वापस लाने के लिए आपातकालीन परिवहन का खर्च भी भारी पड़ सकता है। इसलिए विदेश जाने से पहले पॉलिसी में मेडिकल कवर की सीमा, अस्पताल में भर्ती होने के नियम और इमरजेंसी सहायता की सुविधाएं जांचना जरूरी है। केवल बीमा खरीद लेना काफी नहीं है, बल्कि यह देखना भी जरूरी है कि जरूरत के समय वह कितना काम आएगा।
ट्रैवल इंश्योरेंस में कौन से कवर देखें?
पॉलिसी चुनते समय सबसे पहले अपनी यात्रा और जरूरत के हिसाब से सुविधाएं देखें। मेडिकल खर्च के अलावा यात्रा रद्द होने, फ्लाइट छूटने या यात्रा के बीच रुकावट आने पर मिलने वाले कवर भी उपयोगी हो सकते हैं। हालांकि, हर पॉलिसी में इन सुविधाओं के नियम अलग होते हैं। बीमा कंपनी किन कारणों से यात्रा रद्द होने पर पैसा लौटाएगी, यह पहले समझ लें। इसके अलावा, आपातकालीन मेडिकल निकासी और जरूरत पड़ने पर भारत वापस लाने का खर्च शामिल है या नहीं, इसकी भी जांच करें। पॉलिसी में तय सीमा से ज्यादा खर्च होने पर अतिरिक्त रकम आपको खुद देनी पड़ सकती है।
पहले से बीमारी है तो इन बातों पर दें ध्यान
अगर आपको पहले से कोई बीमारी है, तो बीमा खरीदते समय उसकी सही जानकारी देना जरूरी है। कई पॉलिसियों में पहले से मौजूद बीमारियों के इलाज पर सीमाएं या विशेष शर्तें होती हैं। इसी तरह, स्कीइंग, ट्रेकिंग और स्कूबा डाइविंग जैसी जोखिम वाली गतिविधियों के लिए अलग कवर की जरूरत पड़ सकती है। पॉलिसी खरीदने से पहले यह भी जांचें कि वह किन देशों में लागू है, उसकी शुरुआत और समाप्ति की तारीख क्या है और आपकी उम्र के हिसाब से कोई शर्त तो नहीं है। गलत जानकारी देने से क्लेम में परेशानी आ सकती है या दावा खारिज हो सकता है।
सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर न खरीदें पॉलिसी
कई लोग ट्रैवल इंश्योरेंस चुनते समय केवल प्रीमियम की रकम देखते हैं। लेकिन कम कीमत वाली पॉलिसी में मेडिकल कवर कम हो सकता है या जरूरी सुविधाएं शामिल नहीं हो सकती हैं। इसलिए अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसियों की तुलना करें। बीमा राशि, इलाज की सीमा, डिडक्टिबल यानी वह रकम जो आपको खुद चुकानी पड़ सकती है, और पॉलिसी में शामिल नहीं होने वाली स्थितियों को ध्यान से पढ़ें। अगर कोई शर्त समझ नहीं आती, तो पैसे देने से पहले कंपनी से स्पष्ट जानकारी लें। सही पॉलिसी वही है जो आपकी यात्रा और संभावित जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त सुरक्षा दे।
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क्लेम की प्रक्रिया और इमरजेंसी नंबर जरूर जांचें
ट्रैवल इंश्योरेंस खरीदने से पहले यह पता करें कि जरूरत पड़ने पर क्लेम कैसे करना होगा। बीमा कंपनी 24 घंटे सहायता देती है या नहीं, उसका इमरजेंसी नंबर क्या है और किन दस्तावेजों की जरूरत होगी, यह जानकारी पहले से रखें। पॉलिसी, टिकट, होटल बुकिंग, भुगतान की रसीदें और मेडिकल रिकॉर्ड की प्रतियां सुरक्षित रखें। अगर यात्रा के दौरान कोई परेशानी आती है, तो जल्द से जल्द बीमा कंपनी से संपर्क करें और उसके निर्देशों का पालन करें। इससे क्लेम की प्रक्रिया आसान हो सकती है और जरूरी समय पर सहायता पाने में मदद मिल सकती है।
यात्रा से पहले इन जरूरी बातों की जांच करें
विदेश जाने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपका मेडिकल कवर अस्पताल में भर्ती होने, डॉक्टर की फीस, जांच, एम्बुलेंस और इमरजेंसी में भारत लौटने के खर्च को शामिल करता है या नहीं। साथ ही, बीमा राशि और अलग-अलग इलाज की सीमाएं भी समझें। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास ने भी विदेश जाने वाले भारतीय नागरिकों को मेडिकल इंश्योरेंस कराने की सलाह दी है। याद रखें, ट्रैवल इंश्योरेंस हर तरह के खर्च की गारंटी नहीं देता। सही फैसला लेने के लिए पॉलिसी की शर्तें पढ़ें और अपनी यात्रा के मुताबिक कवर चुनें। इससे अनजान जगह पर मेडिकल इमरजेंसी आने पर आर्थिक दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।