
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों भारत को लेकर जिस तरह सख्त रवैया दिखा रहे हैं, वो हैरान करने वाला है. उन्होंने भारतीय सामानों पर 50% तक का टैरिफ (शुल्क) लगाने की बात कही है, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह नाराज़गी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं है. इसके पीछे "ऑपरेशन सिंदूर" का एक बड़ा कारण हो सकता है.
क्या है ऑपरेशन सिंदूर वाला मामला?
जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर चलाया था, तब पाकिस्तान ने सीजफायर (गोलीबारी रोकने) की गुहार लगाई थी. ट्रंप ने दावा किया था कि उन्होंने भारत-पाक के बीच सीजफायर करवाया, लेकिन भारत सरकार ने यह दावा तुरंत खारिज कर दिया. भारत ने कहा कि सीजफायर पाकिस्तान की पहल पर हुआ था, ट्रंप की कोई भूमिका नहीं थी.
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एक्सपर्ट की राय: ट्रंप को लगी थी ठेस
वाशिंगटन स्थित विदेश मामलों के जानकार माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ट्रंप शायद इस बात से आहत हैं कि भारत ने उनकी मध्यस्थता की बात को सिरे से नकार दिया. यही वजह है कि वो अब भारत पर व्यापारिक दबाव बना रहे हैं. जबकि चीन ने कभी ट्रंप की बातों को सीधे नकारा नहीं, इसीलिए ट्रंप उसके खिलाफ सख्त रवैया नहीं दिखा रहे.
भारत की ‘स्वतंत्र नीति’ से नाराज़ ट्रंप?
कुगेलमैन का कहना है कि भारत का दृढ़ और आत्मनिर्भर रुख ट्रंप को चुभ गया है. भारत ने अमेरिका की बात मानने की जगह अपने फैसले खुद लिए. यह बात ट्रंप को अपमानजनक लगी और वो अपनी नाराज़गी अब टैरिफ और व्यापार नीति में दिखा रहे हैं.
विशेषज्ञ कहते हैं कि ट्रंप भारत से ज्यादा कड़े रवैये में हैं, जबकि चीन के साथ उतनी तीव्र प्रतिक्रिया नहीं दे रहे, जो कि साफ तौर पर एक पाखंड है.
डोनाल्ड ट्रंप की भारत से नाराज़गी सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि राजनयिक सम्मान से जुड़ी हुई है. भारत ने अपनी संप्रभुता बनाए रखी, जो ट्रंप को पसंद नहीं आई. अब वो अपनी नाराज़गी टैरिफ और बयानबाज़ी के ज़रिए निकाल रहे हैं.