अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आम लोगों को बड़ी राहत देने वाला फैसला किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अब क्रेडिट कार्ड कंपनियां 20 से 30 प्रतिशत या उससे ज्यादा ब्याज नहीं वसूल पाएंगी। उनका कहना है कि ऊंची ब्याज दरों के जरिए जनता को लूटा जा रहा था, जिसे अब रोका जाएगा। ट्रंप के ऐलान के मुताबिक 20 जनवरी 2026 से एक साल के लिए क्रेडिट कार्ड ब्याज दर पर 10 प्रतिशत की अधिकतम सीमा लागू होगी।
आम जनता की जेब पर बोझ कम करने की कोशिश
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि उनकी सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता आम अमेरिकियों को आर्थिक राहत देना है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में क्रेडिट कार्ड कंपनियों को खुली छूट मिली रही, जिसका नुकसान सीधे उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा। भारी ब्याज दरों के कारण लोग कर्ज के जाल में फंसते चले गए और इससे मध्यम वर्ग पर सबसे ज्यादा असर पड़ा।
पिछली सरकार पर भी साधा निशाना
राष्ट्रपति ट्रंप ने इस मुद्दे पर अपने राजनीतिक विरोधियों को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार के दौरान क्रेडिट कार्ड कंपनियों की मनमानी पर कोई रोक नहीं थी। इसी वजह से ब्याज दरें लगातार बढ़ती गईं। ट्रंप का दावा है कि उनकी सरकार ऐसी नीतियों को खत्म कर रही है, जिनसे आम जनता को नुकसान होता रहा है।
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एक साल के लिए लागू होगी सीमा
ट्रंप ने बताया कि 10 प्रतिशत ब्याज की यह सीमा फिलहाल एक साल के लिए लागू की जाएगी। इस दौरान सरकार यह देखेगी कि इसका असर उपभोक्ताओं और बाजार पर क्या पड़ता है। उन्होंने इसे अपने प्रशासन के एक साल पूरे होने से भी जोड़ा और कहा कि यह फैसला उनकी सरकार की उपलब्धियों का हिस्सा होगा।
महंगाई और कर्ज से राहत का दावा
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में महंगाई और कर्ज दोनों को लेकर लोग परेशान हैं। क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा ब्याज के कारण रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल होता जा रहा था। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि ब्याज दर सीमित होने से लोगों को सांस लेने का मौका मिलेगा और वे अपने खर्च बेहतर तरीके से संभाल पाएंगे।
सरकार के दूसरे राहत कदम भी जारी
क्रेडिट कार्ड ब्याज पर लगाम लगाने के साथ-साथ ट्रंप सरकार ने पहले भी राहत देने के कदम उठाए हैं। हाल ही में सरकार ने होम लोन को सस्ता करने के लिए बड़े स्तर पर बॉन्ड खरीदने का फैसला किया था। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से आम अमेरिकी परिवारों पर बढ़ते खर्च का दबाव धीरे-धीरे कम होगा और आर्थिक स्थिरता बढ़ेगी।