मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक फैसले ने वैश्विक तेल बाजार का माहौल बदल दिया है। ट्रंप ने घोषणा की कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली। लंबे समय से युद्ध और तनाव के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई थी, लेकिन इस बयान ने निवेशकों को कुछ राहत जरूर दी है। इसके बाद वैश्विक बाजार की दिशा अचानक बदलती दिखाई दी।
कच्चे तेल के दाम गिरे
ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग 2 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड घटकर करीब 109 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। वहीं अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी गिरावट देखी गई। इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दिया। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों में भी कमी दर्ज की गई। लगातार बढ़ती कीमतों से परेशान बाजार को इस खबर के बाद थोड़ी राहत मिली है।

क्यों लिया गया फैसला
रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब, कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अमेरिका से संयम बरतने की अपील की थी। इसके बाद बातचीत के जरिए तनाव कम करने की कोशिश पर जोर दिया गया। हालांकि ट्रंप ने साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो अमेरिका आगे कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा। यानी फिलहाल हमला टला जरूर है लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं माना जा रहा है।
ये भी पढ़ें : ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ बोलने वाले Jahangir Khan ने छोड़ा मैदान, TMC को बड़ा झटका
रूसी तेल पर नई राहत
इसी बीच अमेरिका ने रूसी कच्चे तेल को लेकर भी अहम फैसला लिया है। समुद्र में फंसे तेल टैंकरों के लिए अस्थायी राहत दी गई है। इस फैसले के तहत 30 दिनों तक कुछ रूसी तेल खरीदने की अनुमति दी गई है। बताया जा रहा है कि इसका मकसद उन देशों को राहत देना है जो ऊर्जा संकट और महंगे तेल से जूझ रहे हैं। यह दूसरी बार है जब ऐसी छूट को आगे बढ़ाया गया है।
युद्ध से बढ़ी महंगाई
ईरान से जुड़े तनाव के बाद दुनिया में तेल की कीमतों में भारी उछाल आया था। रिपोर्टों के अनुसार युद्ध शुरू होने के बाद कच्चा तेल 50 प्रतिशत से अधिक महंगा हो चुका है। इसका असर आम लोगों पर भी पड़ा है। भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कुछ ही दिनों में दो बार बढ़ोतरी हो चुकी है। ईंधन महंगा होने से रोजमर्रा की कई चीजों के दाम भी प्रभावित हुए हैं।
भारत ने दिया स्पष्ट जवाब
रूसी तेल को लेकर भारत ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से कहा गया कि भारत अपने हितों और जरूरतों के अनुसार तेल खरीदता है। भारत ने स्पष्ट किया कि वह पहले भी रूस से तेल खरीदता रहा है और आगे भी खरीद जारी रखेगा। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश में कच्चे तेल की उपलब्धता को लेकर किसी तरह की चिंता की जरूरत नहीं है।