अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर दुनिया के कई देशों पर टैरिफ लगाने की तैयारी करते नजर आ रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बावजूद उनके पास टैरिफ लगाने का अधिकार है। ट्रंप का कहना है कि अगर पुराने तरीके से शुल्क लागू नहीं हो पाया तो वे दूसरे कानूनी रास्तों से इसे लागू करेंगे। इस बयान के बाद वैश्विक व्यापार को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़ी बहस
कुछ समय पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के लगाए गए कुछ टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया था। कोर्ट के इस फैसले पर ट्रंप ने खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। ट्रंप का दावा है कि कई विदेशी कंपनियां और देश लंबे समय से अमेरिका का फायदा उठाते रहे हैं और टैरिफ उसी को रोकने के लिए जरूरी है।
नए कानूनी रास्तों पर काम शुरू
रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन अब नए कानूनी प्रावधानों के तहत टैरिफ लागू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए सेक्शन 122 और सेक्शन 301 जैसे कानूनों का सहारा लिया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि इन प्रावधानों के जरिए अमेरिका विदेशी व्यापार नीतियों की जांच कर सकता है और जरूरत पड़ने पर नए शुल्क भी लगा सकता है।
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कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं जांच के दायरे में
अमेरिकी प्रशासन ने कई बड़े देशों के खिलाफ व्यापार से जुड़ी जांच शुरू करने की तैयारी की है। इनमें यूरोपीय संघ, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे देश भी शामिल बताए जा रहे हैं। इन जांचों में सरकारी सब्सिडी, अधिक उत्पादन और कुछ उद्योगों से जुड़े नियमों को लेकर सवाल उठाए जा सकते हैं। इसके आधार पर अमेरिका नए व्यापारिक फैसले ले सकता है।
टैरिफ लागू करना इतना आसान नहीं
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के लिए नए टैरिफ लागू करना आसान नहीं होगा। इसके लिए कई कानूनी प्रक्रियाओं और जांचों से गुजरना पड़ेगा। साथ ही यह भी साफ नहीं है कि इन नए तरीकों से अमेरिका उतनी ही तेजी से राजस्व जुटा पाएगा जितनी उम्मीद की जा रही है। इसलिए इस योजना को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता असर
अगर अमेरिका नए टैरिफ लागू करता है तो इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ सकता है। भारत के आईटी, फार्मा और टेक्सटाइल जैसे सेक्टर प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि इनका बड़ा हिस्सा अमेरिका को निर्यात होता है। इसके अलावा शेयर बाजार और रुपये पर भी दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वैश्विक व्यापार में होने वाले बदलावों पर भारत की नजर बनी हुई है।