Trump Oil Price : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिका की जीत के बाद कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में तेल की कीमत करीब 3 डॉलर प्रति गैलन है, लेकिन भविष्य में यह 2 डॉलर प्रति गैलन से भी नीचे जा सकती है। ट्रंप ने यह बात अपने सोशल मीडिया मंच पर साझा की और इसे ऊर्जा बाजार में संभावित बदलाव से जोड़ा।
ईरान और परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया रुख
ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने दावा किया कि हालात तेजी से बदलेंगे और ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिकी नीति के तहत नियंत्रित रहेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य पूर्व में तनाव और ऊर्जा बाजार दोनों पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
ईरान की तरफ से कड़ी चेतावनी
दूसरी ओर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर घालीबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान की तेल और गैस सुविधाओं को निशाना बनाया गया तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनका कहना है कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ऊर्जा हित और कंपनियां भी जोखिम से अछूती नहीं रहेंगी। उन्होंने संकेत दिया कि किसी भी हमले का जवाब दिया जा सकता है।
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ऊर्जा ढांचे को लेकर बढ़ी चिंता
घालीबाफ ने कहा कि तेल और गैस से जुड़ा बुनियादी ढांचा दोनों पक्षों के लिए संवेदनशील है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी कंपनियां भी संभावित टकराव के प्रभाव से प्रभावित हो सकती हैं। इस बयान को अमेरिका के रक्षा विभाग से जुड़े हालिया दावों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है।
बाजार की नजरें मध्य पूर्व पर
विशेषज्ञ मानते हैं कि तेल की कीमतें केवल राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि वास्तविक आपूर्ति, मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों से तय होती हैं। मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का तनाव बढ़ने पर कीमतों में तेजी आ सकती है, जबकि तनाव कम होने पर बाजार राहत महसूस करता है। इसलिए निवेशक और ऊर्जा कंपनियां घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
क्या सच में सस्ता होगा तेल?
ट्रंप का दावा चर्चा का विषय जरूर बन गया है, लेकिन तेल की कीमतों का भविष्य कई आर्थिक और रणनीतिक कारकों पर निर्भर करेगा। फिलहाल यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते बयानबाजी के दौर ने ऊर्जा बाजार को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाते हैं, उसी पर तेल की कीमतों की अगली चाल काफी हद तक निर्भर करेगी।