अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी नीति बदलते हुए पाकिस्तान को 5800 करोड़ रुपये का बड़ा F-16 अपग्रेड पैकेज मंजूर कर दिया है। इसमें जेट के अपग्रेड, रडार सिस्टम, मिसाइल लॉन्चर, डेटा लिंक और सिक्योर कम्युनिकेशन शामिल हैं। फरवरी 2025 में भी अमेरिका ने 3300 करोड़ रुपये की मदद दी थी। ट्रंप का कहना है कि ये सहायता पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ मजबूत करने के लिए है, लेकिन विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह वाकई सुरक्षा का कदम है या सिर्फ पाकिस्तान को संतुष्ट रखने और भारत को संतुलन में रखने की अमेरिकी रणनीति। असलियत यह है कि चाहे पाकिस्तान के F-16 जितना भी अपग्रेड हो जाएं, वे भारत के राफेल, सुखोई-30 और मिराज-2000 के सामने बिल्कुल पिछड़ जाते हैं।
पुराने F-16 ही सहारा, अमेरिकी मदद से चलते रहेंगे
पाकिस्तान के पास अभी 75 F-16 हैं, जिनमें से कई 1983 से 1990 के बीच मिले थे। बिना अमेरिकी मदद के ये जेट जल्द ही उड़ान लायक नहीं बचते। पाकिस्तान के पास नए लड़ाकू विमान खरीदने का पैसा नहीं है और अमेरिका भी उसे नए जेट बेचने को तैयार नहीं। यही कारण है कि पाकिस्तान किसी भी कीमत पर F-16 को जीवित रखना चाहता है। लेकिन भारत के आधुनिक फाइटर्स की तुलना में ये जेट 20–25 साल पीछे हैं। राफेल की मीटियोर मिसाइल 150+ किमी दूर मार करती है, जो F-16 की AMRAAM रेंज से दोगुनी है। सुखोई-30 MKI ब्रह्मोस मिसाइल तक लेकर उड़ता है। मिराज-2000 और तेजस Mk-1A भी F-16 से ज्यादा आधुनिक और फुर्तीले हैं।
क्यों F-16 भारत के सामने ‘पुराने खिलाड़ी’ साबित होंगे?
भारतीय वायुसेना संख्या, तकनीक और क्षमता तीनों में पाकिस्तान से कई गुना आगे है। भारत के पास 1900+ विमान हैं, पाकिस्तान के पास लगभग 970। भारत किसी भी समय 1300+ विमान तैनात कर सकता है, जबकि पाकिस्तान केवल 450–500। तकनीक के मामले में भी भारत तेज रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में तेजस मार्क-2, AMCA स्टील्थ जेट और रूस के Su-57E की संभावित डील पाकिस्तान के F-16 बेड़े को पूरी तरह बेकार बना देगी। पाकिस्तान के पास न AWACS सिस्टम है, न मजबूत एयर डिफेंस। वहीं भारत के पास S-400, नेट-सेंट्रिक युद्ध क्षमता और श्रेष्ठ पायलट ट्रेनिंग मौजूद है। 2019 में विंग कमांडर अभिनंदन ने MiG-21 से F-16 गिराकर यह साबित भी कर दिया था।
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क्या ट्रंप पाकिस्तान को ‘बुद्धू’ बना रहे हैं?
ट्रंप प्रशासन पाकिस्तान को F-16 अपग्रेड देकर खुश रखना चाहता है, लेकिन उसकी शर्तें बेहद कड़ी हैं ये जेट भारत के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किए जा सकते। अमेरिका केवल मेंटेनेंस और सीमित अपग्रेड दे रहा है, क्योंकि उसे पता है कि F-16 अब पुरानी तकनीक हैं। दूसरी ओर, भारत को F-35 जैसे अत्याधुनिक जेट की पेशकश करके अमेरिका संबंध संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञ कहते हैं कि यह अमेरिका की पुरानी रणनीति है—दोनों देशों को नियंत्रित रखना। लेकिन हकीकत यही है कि अपग्रेड के बाद भी F-16 भारत के फाइटर्स के सामने टिक नहीं पाएंगे। आने वाले 5–7 साल में पाकिस्तान का यह F-16 बेड़ा सिर्फ इतिहास बनकर रह जाएगा।