सप्ताह के पहले कारोबारी दिन शेयर बाजारों की शुरुआत तनाव के साथ हुई। वजह बनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ नीति। ग्रीनलैंड को लेकर यूरोपीय देशों से टकराव और उन पर टैरिफ लगाने के एलान ने वैश्विक निवेशकों को डरा दिया। इसका असर सीधे एशियाई बाजारों पर पड़ा और नकारात्मक संकेत पूरी दुनिया में फैल गए। निवेशकों ने जोखिम लेने से दूरी बनाई, जिससे बाजारों में बिकवाली हावी हो गई।
जापान से हांगकांग तक बाजार धराशायी
एशियाई बाजारों में सोमवार को भारी गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई इंडेक्स सैकड़ों अंकों की गिरावट के साथ कमजोर हुआ, वहीं हांगकांग का हैंगसेंग भी लाल निशान में फिसल गया। निवेशकों को डर है कि अगर टैरिफ वॉर बढ़ा तो वैश्विक व्यापार और सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा। इसी आशंका ने एशिया के लगभग सभी बड़े बाजारों को दबाव में ला दिया।
अमेरिकी बाजारों से भी नहीं मिली राहत
सिर्फ एशिया ही नहीं, अमेरिका के शेयर बाजार भी इस टैरिफ टेंशन से बच नहीं पाए। पिछले कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई। डाउ जोंस और एसएंडपी जैसे प्रमुख इंडेक्स कमजोर बंद हुए। इससे यह साफ हो गया कि ट्रंप की नीति का असर वैश्विक है और निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
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भारतीय शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत
विदेशी बाजारों से मिले खराब संकेतों का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। सोमवार को बाजार खुलते ही सेंसेक्स 500 अंकों से ज्यादा टूट गया, जबकि निफ्टी भी 150 अंकों से अधिक फिसल गया। बैंकिंग, आईटी और मेटल शेयरों में बिकवाली ज्यादा दिखी। निवेशक फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।
पिछले हफ्ते की तेजी पर फिरा पानी
गौर करने वाली बात यह है कि पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन सेंसेक्स और निफ्टी दोनों मजबूती के साथ बंद हुए थे। बाजार में उम्मीद बनी थी कि तेजी जारी रहेगी, लेकिन ट्रंप के नए टैरिफ एलान ने पूरी तस्वीर बदल दी। एक झटके में बाजार का मूड बदल गया और निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
आगे क्या कहते हैं जानकार
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और यूरोप के बीच टैरिफ तनाव बढ़ता रहा, तो इसका असर सिर्फ इन देशों तक सीमित नहीं रहेगा। वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और उभरती अर्थव्यवस्थाएं भी प्रभावित होंगी। भारतीय बाजार भी इससे अछूते नहीं रहेंगे। फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे वैश्विक घटनाक्रम पर नजर रखें और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें।