उड़ान यानी "उड़े देश का आम नागरिक" केंद्र सरकार की क्षेत्रीय संपर्क योजना है। इसका उद्देश्य उन छोटे शहरों और हवाई अड्डों को हवाई सेवाओं से जोड़ना है, जहां पहले नियमित उड़ानें नहीं थीं या बहुत कम थीं। इस योजना के जरिए आम लोगों के लिए हवाई यात्रा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने की कोशिश की गई है। इससे कई छोटे शहर पहली बार हवाई नक्शे पर आए हैं।
क्या हर टिकट 2500 रुपये की होती है?
इस सवाल का जवाब नहीं है। उड़ान योजना के तहत चलने वाली हर सीट 2500 रुपये में उपलब्ध नहीं होती। एयरलाइन कंपनियां केवल कुछ सीमित सीटें ही रियायती दर पर देती हैं। बाकी सीटों का किराया सामान्य बाजार दरों के अनुसार तय होता है। आमतौर पर करीब एक घंटे की उड़ान या लगभग 500 किलोमीटर तक के मार्ग पर 2500 रुपये का किराया लागू होता है।
सीमित सीटों पर मिलता है लाभ
उड़ान योजना का लाभ केवल कुछ आरक्षित सीटों पर ही मिलता है। इसलिए जो यात्री जल्दी टिकट बुक कर लेते हैं, उन्हें कम किराए वाली सीट मिलने की संभावना अधिक रहती है। यही कारण है कि सभी यात्रियों को 2500 रुपये वाली टिकट नहीं मिल पाती। सीटों की संख्या सीमित होने के कारण यह सुविधा पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर उपलब्ध होती है।
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किन शहरों को मिलता है फायदा?
यह योजना मुख्य रूप से छोटे और क्षेत्रीय शहरों के लिए बनाई गई है। दरभंगा, झारसुगुड़ा, किशनगढ़, हुबली जैसे कई शहर इस योजना से जुड़े हुए हैं। दूसरी ओर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और अन्य बड़े महानगरों के बीच चलने वाली अधिकांश उड़ानें इस योजना के दायरे में नहीं आतीं। इसलिए टिकट बुक करने से पहले यह देखना जरूरी है कि आपकी उड़ान उड़ान योजना के तहत संचालित हो रही है या नहीं।
अंतिम किराया क्यों बदल जाता है?
भले ही योजना के तहत मूल किराया सीमित रखा जाता हो, लेकिन टिकट की अंतिम कीमत में हवाई अड्डा शुल्क, जीएसटी और अन्य शुल्क भी जुड़ जाते हैं। इसी वजह से टिकट का कुल भुगतान 2500 रुपये से थोड़ा अधिक हो सकता है। यात्रियों को टिकट बुक करते समय सभी शुल्कों को ध्यान से देखना चाहिए।
एयरलाइन को नुकसान क्यों नहीं होता?
कम किराए पर टिकट बेचने के बावजूद एयरलाइंस को नुकसान नहीं होता क्योंकि सरकार उन्हें वित्तीय सहायता देती है। इसे वायबिलिटी गैप फंडिंग कहा जाता है। इस सहायता के जरिए एयरलाइंस कम मांग वाले मार्गों पर भी अपनी सेवाएं जारी रख पाती हैं। केंद्र सरकार, राज्य सरकारें और अन्य स्रोत मिलकर इस योजना की आर्थिक सहायता का खर्च उठाते हैं। इसी वजह से छोटे शहरों तक हवाई सेवाओं का विस्तार लगातार संभव हो पा रहा है।