शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद पार्टी प्रमुख उद्धव ठाकरे ने संगठन को मजबूत बनाए रखने और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने के लिए मुंबई स्थित शिवालय कार्यालय में महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में पार्टी के विधायक, विधान परिषद सदस्य और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। करीब दो घंटे चली इस बैठक में वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, संगठनात्मक मजबूती और जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक के बाद उद्धव ठाकरे बिना मीडिया से बातचीत किए मातोश्री रवाना हो गए, जबकि पार्टी नेताओं ने बैठक के प्रमुख बिंदुओं की जानकारी दी।
जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देने का निर्देश
बैठक के दौरान उद्धव ठाकरे ने सभी विधायकों और नेताओं को जनता से जुड़े मुद्दों को अधिक प्रभावी ढंग से उठाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी को आम लोगों के बीच अपनी उपस्थिति मजबूत करनी होगी और जनहित के विषयों पर लगातार आवाज उठानी होगी। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि जनता से सीधा संवाद संगठन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
बागी सांसदों के क्षेत्रों का करेंगे दौरा
बैठक में यह भी तय किया गया कि जिन सांसदों ने पार्टी का साथ छोड़ा है, उनके लोकसभा क्षेत्रों में स्वयं उद्धव ठाकरे दौरा करेंगे। वह स्थानीय लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को जानेंगे और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाएंगे। पार्टी इसे संगठनात्मक पुनर्गठन और जनसंपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है।
विधायकों ने दिखाई एकजुटता
बैठक में मौजूद विधायकों और विधान परिषद सदस्यों ने पार्टी नेतृत्व के प्रति अपनी निष्ठा दोहराई। कई नेताओं ने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी अन्य दल की ओर से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और भविष्य में भी वे पार्टी का साथ नहीं छोड़ेंगे। नेताओं ने यह संदेश देने की कोशिश की कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों के बावजूद संगठन एकजुट है और नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़ा है।
संगठन मजबूत करने की नई रणनीति
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे आने वाले दिनों में केवल विधायकों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि नगरसेवकों, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से भी अलग-अलग बैठकें करेंगे। पार्टी संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है। उल्लेखनीय है कि छह सांसदों के जाने के बाद पार्टी की लोकसभा में संख्या घटकर तीन सांसदों तक रह गई है, जबकि राज्यसभा में उसके पास एक सांसद है। ऐसे में संगठन को मजबूत बनाए रखना और कार्यकर्ताओं को सक्रिय रखना पार्टी नेतृत्व की सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।