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Delhi riot case: दिल्ली दंगों की बड़ी साजिश मामले में जमानत न मिलने के बाद पूर्व जेएनयू छात्र नेता उमर खालिद ने अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने वकील एन. साई विनोद के जरिए बुधवार (10 सितंबर) को याचिका दायर की, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के 2 सितंबर के आदेश को चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने उमर खालिद समेत शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और अन्य आठ आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया था। इन सभी पर गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और आईपीसी की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज है।
हाई कोर्ट ने क्या कहा था
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि विरोध-प्रदर्शन का अधिकार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन उसके नाम पर हिंसा या षड्यंत्रकारी गतिविधियां स्वीकार्य नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया, उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका गंभीर रही है, क्योंकि उन्होंने अपने भाषणों से समुदाय विशेष को भड़काने और लामबंद करने का काम किया। अदालत ने यह भी कहा कि मुकदमे की सुनवाई जल्दबाजी में नहीं हो सकती, इसे स्वाभाविक रूप से आगे बढ़ना चाहिए, ताकि न्याय दोनों पक्षों के हित में हो।
दंगों की पृष्ठभूमि
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध के दौरान पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस मामले में उमर खालिद पर आपराधिक साजिश, दंगा और गैरकानूनी सभा में शामिल होने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए। उन्हें सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया था और तब से वह जेल में हैं। पुलिस का दावा है कि खालिद समेत कई अन्य आरोपियों ने दंगों की साजिश रची थी। अब सुप्रीम कोर्ट में याचिका पर सुनवाई के बाद तय होगा कि उन्हें जमानत मिलती है या नहीं।