Unemployment Debt Crisis : भारत में बेरोजगारी और बढ़ते कर्ज का मुद्दा अब सिर्फ आर्थिक बहस नहीं रह गया है, बल्कि आम परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने लगा है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि मई 2026 में देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 5.5 फीसदी तक पहुंच गई। लगातार बढ़ती बेरोजगारी ने लाखों लोगों की आय और आर्थिक सुरक्षा पर असर डाला है। खास बात यह है कि नौकरी की तलाश करने वाले युवाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन अवसर उसी गति से नहीं बढ़ पा रहे हैं।
युवाओं पर सबसे बड़ी मार
शहरी इलाकों में स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रही है। पढ़े-लिखे युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 45 फीसदी से ऊपर पहुंचने की बात सामने आई है। इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में युवा डिग्री होने के बावजूद रोजगार नहीं पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक दबाव भी पैदा कर रही है, क्योंकि लंबे समय तक रोजगार न मिलने से परिवारों की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
कर्ज का बढ़ता बोझ
दूसरी तरफ घरेलू कर्ज लगातार नए स्तर छू रहा है। रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 तक घरेलू कर्ज देश की जीडीपी के 45.5 फीसदी तक पहुंच गया। महामारी से पहले यह आंकड़ा काफी कम था। बढ़ती महंगाई, सीमित आय और जरूरी खर्चों को पूरा करने की मजबूरी के कारण कई परिवार कर्ज का सहारा लेने लगे हैं। इससे बचत घट रही है और आर्थिक दबाव बढ़ता जा रहा है।
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डिजिटल लोन का जाल
विशेषज्ञों के अनुसार डिजिटल लेंडिंग ऐप्स ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। कुछ मिनटों में मिलने वाले छोटे लोन लोगों को आसान विकल्प लगते हैं, लेकिन इनके साथ ऊंची ब्याज दर और अतिरिक्त शुल्क जुड़े होते हैं। कई मामलों में लोग एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने को मजबूर हो जाते हैं। इससे धीरे-धीरे कर्ज का बोझ बढ़ता जाता है और आर्थिक स्थिति कमजोर होती चली जाती है।
क्यों बढ़ रही मुश्किल?
बेरोजगारी और कर्ज एक-दूसरे को मजबूत कर रहे हैं। नौकरी नहीं मिलने पर लोग खर्च चलाने के लिए उधार लेते हैं, जबकि कम आय वाले लोग बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए लोन का सहारा लेते हैं। जब आय और खर्च के बीच अंतर बढ़ता है तो परिवारों की बचत खत्म होने लगती है। यही वजह है कि कई लोग अब केवल जरूरी खर्च पूरे करने के लिए भी कर्ज लेने को मजबूर दिखाई दे रहे हैं।
आगे क्या है रास्ता?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस चुनौती से निपटने के लिए रोजगार के नए अवसर बढ़ाना सबसे जरूरी है। इसके साथ ही डिजिटल लोन क्षेत्र में सख्त नियम लागू करने, ब्याज दरों पर निगरानी रखने और लोगों को वित्तीय जागरूकता देने की जरूरत है। आम लोगों को भी बिना शर्तें समझे कर्ज लेने से बचना चाहिए। जब तक रोजगार और आय के अवसर नहीं बढ़ेंगे, तब तक बेरोजगारी और कर्ज की यह दोहरी मार बड़ी चुनौती बनी रह सकती है।