UP School Books: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने राज्य के करोड़ों छात्र-छात्राओं के हित में एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि अब स्कूलों में केवल शासन द्वारा अधिकृत किताबों से ही पढ़ाई कराई जाएगी। अनधिकृत पुस्तकों के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस फैसले का मुख्य उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और बाजार में बिक रही त्रुटिपूर्ण या अनाधिकृत किताबों पर पूरी तरह से रोक लगाना है।
अधिकृत किताबें अनिवार्य की गई
आपको बता दें कि कक्षा 9 और 10 के लिए अंग्रेजी, गणित और विज्ञान की अधिकृत किताबें अनिवार्य कर दी गई हैं। वहीं कक्षा 11 और 12 के लिए 36 विषयों की अधिकृत पुस्तकें लागू की गई हैं। पूरे प्रदेश में एनसीईआरटी की 70 किताबों को प्रचलन में लाया गया है। इसके अलावा हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों के लिए भी 12 चयनित पुस्तकें तय की गई हैं।
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मान्यता प्राप्त पुस्तकों को ही बढ़ावा दिया जाए
बता दें कि बोर्ड ने साफ कहा है कि तय किताबें सस्ती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं। इसका खास ध्यान रखा जाएगा कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को किसी तरह की दिक्कत न हो। ये नियम सरकारी, सहायता प्राप्त और प्राइवेट सभी स्कूलों पर लागू होगा। यूपी बोर्ड का साफ संदेश है कि अब शिक्षा व्यवस्था में सिर्फ निर्धारित और मान्यता प्राप्त पुस्तकों को ही बढ़ावा दिया जाएगा।
नियमों का पालन न करने पर होगी कड़ी कार्रवाई
बोर्ड ने साफ चेतावनी दी है कि अगर कोई स्कूल इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को टास्क फोर्स गठित कर स्कूलों और बुक स्टोर्स का औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम से शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।