उत्तर प्रदेश सरकार की कैबिनेट में जल्द ही बड़े स्तर पर बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि गुजरात की तरह यूपी में भी कैबिनेट का चेहरा बदला जा सकता है। कहा जा रहा है कि करीब 70 प्रतिशत मंत्रियों पर फेरबदल की गाज गिर सकती है। इसका असर खासतौर पर उन नेताओं पर पड़ सकता है जो 2017 और 2022 की सरकार में लगातार मंत्री बने हुए हैं। बीते 8 से 9 साल से मंत्री पद संभाल रहे कई चेहरे इस बार बाहर हो सकते हैं।
पुराने मंत्रियों पर संकट, नए चेहरों की तलाश
सूत्र बताते हैं कि लंबे समय से सरकार में बने रहने वाले मंत्रियों में से केवल कुछ को ही जगह मिल पाएगी। पार्टी अब नए और चुनावी रूप से मजबूत चेहरों को आगे लाने की रणनीति पर काम कर रही है। जातीय संतुलन और क्षेत्रीय समीकरण इस फेरबदल का बड़ा आधार होंगे। माना जा रहा है कि संगठन और सरकार के बीच तालमेल को और मजबूत करने के लिए यह कदम उठाया जाएगा।
कुर्मी समाज पर खास नजर
भले ही भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई की कमान कुर्मी समाज से आने वाले पंकज चौधरी को दी गई हो लेकिन कैबिनेट विस्तार में भी कुर्मी समाज को खास प्रतिनिधित्व मिल सकता है। सूत्रों के अनुसार 2 से 3 कुर्मी नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इससे 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश मानी जा रही है।
इन नेताओं की हो सकती है एंट्री
सूत्रों के मुताबिक रामपुर से विधायक आकाश सक्सेना और अलीगढ़ से कुंवर जयवीर सिंह को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। इसके अलावा पंकज सिंह, साध्वी निरंजन ज्योति, भूपेंद्र सिंह चौधरी, पूजा पाल, मनोज पांडेय, कृष्णा पासवान, राम रतन कुशवाहा, पद्मसेन चौधरी और अशोक कटारिया के नामों पर भी चर्चा है। दावा यह भी है कि पहले मंत्री रह चुके महेंद्र सिंह की दोबारा वापसी हो सकती है।
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दिल्ली से लखनऊ तक चला मंथन
पिछले साल संगठन में बदलाव के बाद कैबिनेट फेरबदल की अटकलें तेज हुईं। पंकज चौधरी के अध्यक्ष बनने के बाद कोर ग्रुप की बैठक हुई जिसमें संगठन और सरकार की जिम्मेदारियों पर चर्चा हुई। इसके बाद दिल्ली में हाईकमान से मुलाकातें हुईं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी नेतृत्व से विस्तार से बातचीत की है। माना जा रहा है कि इसी चर्चा के बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा।
मकर संक्रांति के बाद फैसला संभव
फिलहाल योगी सरकार में कुल 54 मंत्री हैं। इनमें कैबिनेट मंत्री, स्वतंत्र प्रभार और राज्य मंत्री शामिल हैं। सूत्रों का कहना है कि मकर संक्रांति के बाद किसी भी दिन फेरबदल हो सकता है। 2027 चुनाव से पहले पार्टी सरकार और संगठन दोनों में संतुलन बनाना चाहती है। ऐसे में यह फेरबदल सिर्फ बदलाव नहीं बल्कि चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।