सुबह की रोशनी खेतों तक तो पहुंचती है, लेकिन गलियों में सन्नाटा पसरा रहता है। जिन घरों में कभी बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब ताले लटके हैं। लोग दरवाजे के पीछे से झांकते हैं, खुलकर बात करने से कतराते हैं। किसी को पुलिस का डर है, किसी को बदनामी का और किसी को अपने ही गांव के लोगों से खतरा महसूस होता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रिश्ते तय करते समय लोग गांव का नाम बताने से बचने लगे हैं। वजह कोई मामूली विवाद नहीं, बल्कि मोबाइल के जरिए देशभर में फैली साइबर ठगी है, जिसने पूरे इलाके की पहचान बदल दी है।
योगी के आदेश के बाद बड़ा पुलिस एक्शन
दरअसल, यूपी के मथुरा जिले का देवसरस गांव इन दिनों पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इसे यूपी का जामताड़ा कहा जाने लगा है। जैसे ही इस नेटवर्क की जानकारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंची, पुलिस को सख्त कार्रवाई के निर्देश मिले। इसके बाद पिछले पांच दिनों से बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चल रहा है। ड्रोन से निगरानी, खेतों में छापेमारी और हर संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है। 11 दिसंबर की तड़के हुई रेड के बाद करीब 120 आरोपी हरियाणा और राजस्थान की तरफ भाग निकले, जबकि अब तक 37 लोगों को हिरासत में लिया गया है। पूछताछ में खुलासा हुआ कि महज 30 दिनों में 200 से ज्यादा लोगों से 2 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी की गई।
ग्राउंड रिपोर्ट ने खोली गांव की सच्चाई
ग्राउंड पर रहने वाले बुजुर्ग राम प्रसाद बताते हैं कि पिछले 15 से 18 साल में करीब 200 हिंदू परिवार गांव छोड़ चुके हैं। अब गांव में उनकी हिस्सेदारी महज 30 प्रतिशत रह गई है। बदनामी इतनी है कि बाहर के गांवों में लोग यहां अपनी बेटियों के रिश्ते तक नहीं करते। लोग घर छोड़ सकते हैं, लेकिन जमीन किसके भरोसे छोड़ी जाए, यही सबसे बड़ा सवाल है। यही मजबूरी कई परिवारों को गांव में टिके रहने पर मजबूर कर रही है, जबकि डर और असुरक्षा हर कदम पर साथ चल रही है।
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पुलिस के 4 खुलासे और आगे की राह
पुलिस जांच में साइबर ठगी के तरीके भी सामने आए हैं। ड्रोन से खेतों में बने 27 ठिकाने मिले, जहां झोपड़ियों से ठगी का नेटवर्क चलता था। जांच में चार बड़े खुलासे हुए। पहला, गांव में कपड़ों से ज्यादा मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिले। दूसरा, किसी ऑफिस की जरूरत नहीं, खेतों से पूरा नेटवर्क ऑपरेट होता था। तीसरा, ठगी का पैसा रिश्तेदारों के नाम पर खातों और प्रॉपर्टी में लगाया जाता था। चौथा, गांव की लोकेशन सबसे बड़ी ताकत थी, क्योंकि राजस्थान और हरियाणा बॉर्डर बेहद करीब हैं। पुलिस साफ कर चुकी है कि ऑपरेशन तब तक जारी रहेगा, जब तक साइबर ठगी पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती। अब सवाल यही है कि सख्त कार्रवाई के बाद क्या यह इलाका फिर से अपनी पुरानी पहचान पा सकेगा या ‘यूपी का जामताड़ा’ का ठप्पा हमेशा के लिए लग जाएगा।