उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं को लेकर सरकार ने नए नियम लागू कर दिए हैं। इन नियमों का मकसद यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और सेवाओं को अधिक भरोसेमंद बनाना है। नए प्रावधानों के तहत अब ओला, उबर और अन्य ऐप आधारित टैक्सी कंपनियों को राज्य में काम करने के लिए अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। बिना पंजीकरण के कोई भी कंपनी अपनी सेवा जारी नहीं रख पाएगी।
ड्राइवरों पर होगी सख्त निगरानी
नई व्यवस्था में ड्राइवरों की नियुक्ति को लेकर भी कड़े मानक तय किए गए हैं। हर ड्राइवर का पुलिस सत्यापन जरूरी होगा। इसके साथ ही कम से कम दो साल का ड्राइविंग अनुभव होना भी अनिवार्य रखा गया है। फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य जांच भी कराई जाएगी। सरकार ने नशे में वाहन चलाने को लेकर सख्त रुख अपनाया है। यदि कोई चालक पिछले तीन वर्षों में इस तरह के मामले में दोषी पाया गया है, तो उसे सेवा का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा।
महिला यात्रियों की सुरक्षा पर जोर
यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सभी गाड़ियों में पैनिक बटन और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाना जरूरी किया गया है। इससे वाहन की लोकेशन और चालक की जानकारी आसानी से उपलब्ध रहेगी। महिला यात्रियों को ऐप में महिला चालक चुनने की सुविधा भी मिलेगी। इसके अलावा यात्रा से जुड़ी जानकारी और बुकिंग रिकॉर्ड भी तय समय तक सुरक्षित रखे जाएंगे।
शिकायत और बीमा की सुविधा
ड्राइवरों के हितों को भी नए नियमों में शामिल किया गया है। उन्हें स्वास्थ्य बीमा और टर्म बीमा जैसी सुविधाएं दी जाएंगी। वहीं यात्रियों की शिकायतों के समाधान के लिए 24 घंटे सक्रिय शिकायत केंद्र बनाया जाएगा। इससे किसी भी समस्या का जल्दी समाधान किया जा सकेगा।
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सड़क पर सुरक्षा बढ़ाने की तैयारी
सरकार का मानना है कि इन नए नियमों से यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा और परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित होगी। साथ ही ड्राइवरों की रेटिंग के आधार पर समय-समय पर प्रशिक्षण भी दिया जाएगा ताकि सेवा की गुणवत्ता लगातार बेहतर होती रहे। नए नियमों के बाद उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं का तरीका पहले से काफी बदलता नजर आ सकता है।